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इंस्पेक्टर ने महिला सिपाही से 4.20 लाख ली घूस

प्रयागराज में करीब 60 लाख रुपए के साइबर फ्रॉड की जांच में अब साइबर थाने के पुलिसकर्मियों पर ही घूस लेने का आरोप लगा है। महिला कांस्टेबल ने साइबर थाने के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक ओम नारायण गौतम और सिपाही अभिषेक कुमार पर फ्रीज हुई रकम रिलीज कराने के नाम पर 4.20 लाख रुपए लेने का आरोप लगाया है।

महिला कांस्टेबल का आरोप है कि दोनों ने फ्रीज रकम का 20 प्रतिशत कमीशन मांगा था। रकम देने के बाद ही कोर्ट के आदेश के बावजूद फ्रीज रुपए रिलीज कराने की कार्रवाई आगे बढ़ाने की बात कही गई। रकम वापस मांगने पर उसे और उसके भाई को फर्जी मामले में फंसाने की धमकी दी गई।

शिकायत के बाद प्रारंभिक जांच कराई गई। इसके बाद सोमवार को सिविल लाइंस थाने में इंस्पेक्टर ओम नारायण गौतम और सिपाही अभिषेक कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई। पुलिस अब लगाए गए आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है।

भाई के साथ हुआ था 60 लाख का साइबर फ्रॉड

महिला कांस्टेबल के मुताबिक, उसका सगा भाई मानवेन्द्र सिंह इस मामले का वादी है। उसके साथ टेलीग्राम और अलग-अलग वेबसाइट के जरिए करीब 60 लाख रुपए का इन्वेस्टमेंट फ्रॉड हुआ था। 28 मई 2025 को साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था।

उस समय मामले की विवेचना तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक ओम नारायण गौतम कर रहे थे। महिला कांस्टेबल का कहना है कि मुकदमा दर्ज होने से पहले ही नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत की गई थी। इसके बाद करीब 33 लाख रुपए फ्रीज कराए गए थे।

कोर्ट ने दो बार रकम खाते में भेजने का दिया था आदेश

महिला कांस्टेबल के अनुसार, एसीजेएम-5 की अदालत ने 12 अगस्त 2025 को 3,84,155.92 रुपए और 22 सितंबर 2025 को 29,87,818 रुपए पीड़ित के खाते में भेजने का आदेश दिया था।

आरोप है कि कोर्ट का आदेश होने के बावजूद रकम रिलीज कराने में काफी देरी की गई। जब महिला कांस्टेबल इस संबंध में विवेचक से मिली तो उससे कथित तौर पर 20 प्रतिशत रकम की मांग की गई।

बोले- बैंक अधिकारियों को मैनेज करना पड़ता है

शिकायत के मुताबिक, विवेचक ने कहा कि फ्रीज रकम रिलीज कराने के लिए 20 प्रतिशत कैश देना होगा। इसके लिए बैंक अधिकारियों को मैनेज करने, बैंक को ई-मेल करने और साइबर अपराधियों की तलाश में दूसरे राज्यों में जाने का खर्च बताया गया।

महिला कांस्टेबल का कहना है कि शुरुआत में उसने रुपए देने से इनकार किया, लेकिन परिवार पर कर्ज होने के कारण बाद में अलग-अलग तारीखों में रकम दी।

सिपाही बोली- चार किस्तों में 4.20 लाख रुपए दिए

4 दिसंबर 2025: हीरा हलवाई चौराहे पर 50 हजार रुपए

5 दिसंबर: मनमोहन पार्क में 1 लाख रुपए

10 दिसंबर: मनमोहन पार्क स्थित मंदिर के सामने 1 लाख रुपए

11 दिसंबर: रिजर्व पुलिस लाइन गेट नंबर-8 पर 90 हजार रुपए

इसके बाद 80 हजार रुपए रिजर्व पुलिस लाइन में सिपाही अभिषेक कुमार के माध्यम से दिए।

इस तरह कुल 4.20 लाख रुपए देने का आरोप है। महिला कांस्टेबल का कहना है कि उसने अपने बैंक खातों से एटीएम के जरिए रकम निकाली थी। उसने बैंक और एटीएम से संबंधित दस्तावेज भी पुलिस को साक्ष्य के तौर पर दिए हैं।

सिपाही ने कहा- विवेचक ने 2.50 लाख रुपए हिस्सा लिया

महिला कांस्टेबल ने सिपाही अभिषेक कुमार पर भी रकम लेने का आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार, सिपाही ने उससे कहा था कि विवेचक अपना 2.50 लाख रुपए का हिस्सा ले चुका है।

उसका यह भी आरोप है कि इंस्पेक्टर को ऑनलाइन विवेचना और साइबर अपराध की प्रक्रिया की जानकारी कम थी और ऑनलाइन काम सिपाही ही करता था।

महिला कांस्टेबल ने इंस्पेक्टर पर अपनी बेटी के लिए NEET की तैयारी से संबंधित ऑनलाइन कोर्स और शिक्षण सामग्री लेने का भी आरोप लगाया है।

शिकायत के मुताबिक, महिला कांस्टेबल का भाई अनएकेडमी में एजुकेशन काउंसलर और मैनेजर के पद पर काम करता है। आरोप है कि इंस्पेक्टर ने अपनी बेटी की NEET तैयारी के लिए संस्थान से ऑनलाइन कोर्स और स्टडी मैटेरियल लिया। कर्मचारियों के सामने मामला खुला तो हुआ विवाद

महिला कांस्टेबल का कहना है कि एक दिन जब वह साइबर थाने पहुंची तो इंस्पेक्टर और सिपाही वहां नहीं मिले। उसने थाने के दूसरे कर्मचारियों को कथित 20 प्रतिशत रकम मांगने की जानकारी दी।

आरोप है कि कर्मचारियों ने जब इस बारे में विवेचक और सिपाही से पूछा तो विवाद हो गया। इसके बाद इंस्पेक्टर ने कथित तौर पर कहा कि अब वह कोई रकम वापस नहीं करेगा। महिला कांस्टेबल का आरोप है कि उसे भाई के खाते में अवैध रकम भेजकर फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी भी दी गई।

केस डायरी में बैकडेट में पर्चे दर्ज करने का आरोप

महिला कांस्टेबल ने केस डायरी में बैकडेट में पर्चे दर्ज करने का भी आरोप लगाया है। उसका कहना है कि 23 जून 2026 को अधिकारियों से शिकायत करने और विवेचना स्थानांतरित किए जाने के बाद उसी रात सीसीटीएनएस के जरिए उसके खिलाफ कुछ पर्चे दर्ज किए गए।

इनमें पुलिस लाइन में मुकदमे की पैरवी को लेकर रोष जताने जैसी बातें लिखे जाने का आरोप है। महिला कांस्टेबल का कहना है कि उसके खिलाफ तस्करा भी डलवाया गया, जबकि आरोप गलत हैं।

उसने सीसीटीएनएस में पर्चे तैयार होने और ऑनलाइन सिंक होने के समय की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।

एक आरोपी के खिलाफ ही चार्जशीट

महिला कांस्टेबल का आरोप है कि मुकदमा दर्ज हुए एक साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन साइबर फ्रॉड करने वाले अधिकांश आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई। विवेचना दूसरे अधिकारी को ट्रांसफर होने के बाद एक आरोपी के खिलाफ चार्जशीट लग सकी।

पीड़ित पक्ष के अनुसार, उसके भाई के खाते में करीब 24 लाख रुपए वापस आ चुके हैं, जबकि बाकी रकम अभी वापस नहीं हुई है।

व्हाट्सऐप चैट और कॉल रिकॉर्डिंग भी साक्ष्य

महिला कांस्टेबल ने अपनी शिकायत के साथ व्हाट्सऐप चैट, व्हाट्सऐप कॉलिंग, ऑडियो रिकॉर्डिंग और एटीएम से निकाली गई रकम का विवरण पुलिस को दिया है। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस इन सभी साक्ष्यों की जांच करेगी।

सिविल लाइंस थाना प्रभारी रामाश्रय यादव ने बताया कि महिला कांस्टेबल की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है। मामले की जांच की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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