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नोएडा में 4 दिन में पकड़ी 2.80 करोड़ की दवा

नोएडा अवैध मेडिसन छिपाने का नया ठिकाना बन गया है। सिर्फ 4 दिन के अंदर ज्वाइंट टीम ने यहां से करीब 2.80 करोड़ रुपए की दवाएं बरामद की हैं। ये दवाएं दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन और जिला औषधि विभाग की संयुक्त टीम ने पकड़ी। हैरान करने वाली बात ये है कि ज्यादातर दवाओं पर साफ लिखा था- सरकारी आपूर्ति, बिक्री के लिए नहीं।

छिपाने के लिए तस्करों ने पॉश सोसाइटी के फ्लैट से लेकर शहर से दूर वेयरहाउस तक का इस्तेमाल किया। औषधि निरीक्षक जय सिंह ने बताया- दोनों मामले अलग-अलग हैं, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में दवाएं मिलने से नेटवर्क की आशंका है। स्रोत, सप्लाई चेन और इसमें शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। फिलहाल दोनों मामलों की गहराई से जांच चल रही है। 22 जुलाई की रात टीम ने नोएडा की आम्रपाली प्रिंसली स्टेट सोसाइटी में छापा मारा। एक रिहायशी फ्लैट से करीब 2 करोड़ रुपए की दवाएं मिलीं। इसमें कैंसर रोधी दवाएं, एंटी रेबीज वैक्सीन, एंटी स्नेक वेनम सीरम, इम्युनोग्लोबुलिन जैसी महंगी दवाएं शामिल थीं।

जिन वैक्सीन को कोल्ड चेन में रखना जरूरी था, उन्हें कमरे के सामान्य तापमान पर रखा गया था। इससे दवाएं खराब होने का खतरा था। औषधि विभाग ने 8 दवाओं के सैंपल जांच के लिए भेजे हैं। इस मामले में आरोपी आनंद कुमार को गिरफ्तार किया गया है। उसके बैंक खातों की भी जांच हो रही है।

वहीं दूसरे मामले में सेक्टर-123 का अवैध वेयरहाउस का प्रयोग किया गया। यहां 23 जुलाई की रात पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में नशीली दवाओं की तस्करी के मुख्य आरोपी शिव नारायण झा के नोएडा में छिपे होने की सूचना मिली। दिल्ली एंटी नारकोटिक्स फोर्स और औषधि विभाग ने सेक्टर-123 के एक वेयरहाउस पर रेड की। यहां से 80 लाख रुपए की दवा बरामद हुई।

पकड़ी गई दवाएं ट्रैमाडोल और अल्प्राजोलम जैसी नशीली दवाएं थीं, जो सील पैक थीं। शिव नारायण के साथ अमन शर्मा भी गिरफ्तार हुआ। पूछताछ में पता चला कि शिव नारायण गाजियाबाद में नौकर के नाम पर लाइसेंस लेकर मेडिकल स्टोर चला रहा था। यहीं से सप्लाई करता था। वेयरहाउस उसने 2-3 महीने पहले ही किराए पर लिया था। यहां कोई वैध बिल भी नहीं मिला।

सोसाइटी के फ्लैट और वेयरहाउस

दोनों मामलों में एक बात कॉमन है दवाओं को छिपाने का तरीका। एक ने पॉश सोसाइटी को चुना जहां बिना इजाजत किसी के आने की अनुमति नहीं होती। दूसरे ने पुश्ते के किनारे बना वेयरहाउस चुना। ये शहर से काफी दूर है। यहां तक पहुंचना मुश्किल है, इसलिए तस्कर यहां खेप छिपाते थे।

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