उद्धव की पार्टी टूटी, राउत ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में गाली दी, 9 में से 6 सांसद बागी
महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के 9 में से 6 सांसदों ने बगावत कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, छह सांसदों ने बुधवार सुबह 9:30 बजे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को शिंदे गुट में विलय के लिए चिट्ठी भेजी। हालांकि, अभी स्पीकर या बागी गुट की तरफ इसकी पुष्टि नहीं की गई है।
बागी सांसदों में नागेश पाटिल आष्टीकर और संजय दीना पाटिल शामिल हैं। संजय ने बुधवार सुबह ही पार्टी छोड़ने की खबरों को खारिज किया था। इस बीच दिल्ली में राज्यसभा सांसद संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बागी सांसदों को गाली दी।
राउत ने कहा- ये साले #$% के। ये बेईमान लोग हैं। बेईमानी उनके खून में हैं। राउत ने बाद में सफाई देते हुए कहा- मराठी में ऐसे शब्द आम बोलचाल का हिस्सा हैं। शिवसेना में चार साल में यह दूसरी बड़ी टूट है। जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायकों ने बगावत कर शिवसेना का अलग गुट बनाया था। पिछले 3 महीने के दौरान विपक्षी गुट के 27 सांसदों ने अपनी पार्टी से बगावत करते हुए भाजपा या NDA को समर्थन दिया है। इनमें 7 AAP के राज्यसभा सांसद और 20 TMC के लोकसभा सांसद हैं।
शिवसेना (UBT) में टूट की अटकलों के बीच सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) चीफ और यूपी के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट होने वाली है और पार्टी के कई नेता BJP में शामिल होने के लिए तैयार हैं।
सपा चीफ अखिलेश यादव ने पार्टी में टूट की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि सपा मजबूत और एकजुट है। अखिलेश ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा के अपने विधायक पाला बदलने वाले हैं। महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने शिवसेना (UBT) में टूट के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराने वाले आरोपों को खारिज किया।
उन्होंने कहा- उद्धव ठाकरे के सांसद कहां जाते हैं, इससे भाजपा का कोई लेना-देना नहीं है। उद्धव ठाकरे को खुद सोचना चाहिए कि उनके सांसद और विधायक उन्हें छोड़कर क्यों जा रहे हैं।
बावनकुले ने कहा कि अगर सांसद एकनाथ शिंदे के साथ जा रहे हैं, तो यह शिंदे और उद्धव का आंतरिक मामला है। भाजपा या उसके किसी नेता का इससे कोई संबंध नहीं है।
संजय राउत के पैसों के लेन-देन वाले आरोपों पर उन्होंने कहा- यह मान लेना गलत है कि कोई सांसद या विधायक पैसे के लिए दल बदलता है। संजय राउत ने लोकसभा में परिसीमन बिल गिरने के कारण भाजपा पर विपक्षी दलों को तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा- अगर परिसीमन बिल पास नहीं हुआ तो क्या देश पर आसमान टूट पड़ेगा? सभी दलों की सहमति बनने के बाद इसे फिर लाया जा सकता था।
राउत ने कहा- बिल पारित नहीं होने के बाद भाजपा जिस तरह की राजनीतिक गतिविधियां कर रही है, वह बेहद आपत्तिजनक और निंदनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा विपक्ष को कमजोर करने के लिए दल-बदल को बढ़ावा दे रही है। लोकसभा में शिवसेना (UBT) के 9 सांसद हैं। दल-बदल कानून के तहत किसी दल में टूट के बाद अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों का साथ होना जरूरी है।
यानी अगर 9 में से 6 सांसद एक साथ अलग होने का फैसला करते हैं, तो वे खुद को वैध गुट बताने का दावा कर सकते हैं।
इसी वजह से 6 सांसदों के बगावत करने की खबर राजनीतिक और कानूनी, दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जानकारों के मुताबिक, सिर्फ अलग गुट बनाना ही काफी नहीं होगा।
आगे चलकर इन सांसदों को किसी दूसरे दल में विलय की प्रक्रिया भी पूरी करनी पड़ सकती है, ताकि उनकी स्थिति कानूनी रूप से और मजबूत हो सके।

