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UP : हम बिस्तर हो जाओ… जिला उपाध्यक्ष बना देंगे, गंभीर आरोप

अगर मैं आपको जिला उपाध्यक्ष बना दूं, तो आपको मेरे साथ लखनऊ, दिल्ली हर जगह चलना होगा। किसी को शक भी नहीं होगा। बस एक बार मेरे साथ हमबिस्तर हो जाइए। अगर आप मेरी बात मान जाएंगी, तो मैं आपको जिला पंचायत का टिकट भी दिलवा दूंगा।

यह कहना है महोबा की बीजेपी से पूर्व जिला मंत्री दीपाली तिवारी का है। दीपाली तिवारी ने वर्तमान जिला अध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। दीपाली ने रविवार शाम को लाइव आकर उन्होंने कहा कि बीजेपी जिला अध्यक्ष ने जिला उपाध्यक्ष पद के बदले उन पर हमबिस्तर होने का दबाव बनाया।

दीपाली तिवारी ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने जिला उपाध्यक्ष पद के लिए बात की, तो जिला अध्यक्ष ने उन्हें दिल्ली और लखनऊ साथ चलने का प्रस्ताव दिया। बात न मानने पर उन्हें पद और पार्टी से हटाने की भी धमकी दी। दीपाली ने यह भी कहा कि पार्टी के दो अन्य बड़े पदाधिकारी, एक जिला महामंत्री और एक जिला उपाध्यक्ष, भी उन पर जिला अध्यक्ष की बात मानने का दबाव बना रहे थे।

दीपाली तिवारी ने बताया कि उन्हें धमकी दी कि यदि वह चुप नहीं रहीं तो उनके पति को झूठे दुष्कर्म के मामले में फंसाकर जेल भिजवा दिया जाएगा। यह बात उन्होंने अपने पति को भी बताई, जिन्होंने उन्हें सामने आकर शिकायत करने की सलाह दी।

दीपाली ने सोमवार दोपहर करीब एक बजे वह अपना शिकायत पत्र लेकर एसपी कार्यालय पहुंची। उन्होंने कहा कि मोहनलाल कुशवाहा के खिलाफ वह औपचारिक शिकायत दर्ज कराने आई हैं। दीपाली तिवारी ने कहा कि उन्होंने 34 दिन पहले जिला मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

जिसे मोहनलाल ने पार्टी से स्वीकृत दिखाते हुए सोशल मीडिया पर साझा कर दिया था। जबकि शीर्ष नेतृत्व का कहना है कि ऐसा कोई आधिकारिक स्वीकृति नहीं दी गई है। उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और मोहनलाल कुशवाहा को जिला अध्यक्ष पद से हटाया जाए और उन्हें न्याय दिलाया जाए।

दूसरी ओर, इन आरोपों पर भाजपा जिला अध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा ने कहा कि यह आरोप पूरी तरह से निराधार और मनगढ़ंत है। कुशवाहा का कहना है कि सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे इन आरोपों में रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है और यह केवल उनकी छवि खराब करने की साजिश है।

चार बड़े आरोप

1- पति को जेल में डालने की धमकी

दीपाली तिवारी ने कहा कि जब उन्हें धमकी दी गई कि उनके पति को झूठे मामले में फंसाकर जेल में डाल दिया जाएगा, तब वह बोलने पर मजबूर हुईं और सामने आईं। उनके पति ने भी उन्हें हिम्मत दी कि वह अपने पक्ष को सामने रखें और न डरें, क्योंकि सच बोलने से अन्य महिलाओं को भी अत्याचार से बचाया जा सकता है।

2- संगठन में पद के बदले आपत्तिजनक मांग

दीपाली तिवारी ने बताया कि कुछ समय पहले संगठन में एक टीम का गठन हुआ था। उन्होंने कई बार निवेदन किया कि उन्हें भी टीम में शामिल कर उच्च पद दिया जाए। इस पर जिला अध्यक्ष मोहन लाल जी ने उन्हें बुलाया। वह अपनी बात रखने उनके पास गईं।

आरोप है कि मोहन लाल जी ने कहा कि वह उन्हें जिला उपाध्यक्ष बना देंगे, लेकिन इसके बदले वह उनसे क्या लेंगी। दीपाली के अनुसार, उनसे इशारों में बात की गई और कहा गया कि वह समझदार हैं, सब कुछ समझ जाएं। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि वह उनकी बात मान लें तो उन्हें पद दे दिया जाएगा।

3- जिला पंचायत टिकट का प्रस्ताव

दीपाली तिवारी ने बताया कि यह सुनकर वह स्तब्ध रह गईं। उन्होंने कहा कि जो बात कही गई, वह अत्यंत आपत्तिजनक थी। कथित रूप से उनसे कहा गया कि “एक बार समझौता कर लीजिए।” उन्होंने जवाब दिया कि आपके घर में भी बहन-बेटियां हैं, ऐसी बातें कैसे की जा सकती हैं। इसके बाद वह वहां से जाने लगीं। आरोप है कि जाते समय उन्हें यह भी कहा गया कि यदि वह बात मान लें तो उन्हें जिला पंचायत का टिकट भी दिलाया जा सकता है।

4- करीबी पदाधिकारी के माध्यम से दबाव

दीपाली तिवारी ने कहा कि उन्होंने 10 वर्षों तक संगठन में कार्य किया है और वह नहीं चाहती थीं कि उनकी मेहनत व्यर्थ जाए। वह लगातार काम करती रहीं और शीर्ष नेतृत्व से न्याय की उम्मीद रखती रहीं। लेकिन बाद में मोहनलाल के एक करीबी पदाधिकारी पंकज तिवारी ने उनसे कहा कि जिला अध्यक्ष की बात मान लें, तो उन्हें जिला महामंत्री बनाया जा सकता है।

दीपाली ने बताया कि उन्होंने स्पष्ट रूप से इनकार किया और दोबारा ऐसी बातें न करने की चेतावनी दी। इसके बावजूद उनके चरित्र पर सवाल उठाए गए और सोशल मीडिया पर टिप्पणी की गई, जबकि पार्टी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

दीपाली ने कहा– डरने वाली नहीं, न चुप बैठने वाली मैंने कभी गलत काम नहीं किया। लोग कहते हैं कि मैंने मकान तक बेच दिया, लेकिन मैं अपने चरित्र को बेचकर कुछ भी हासिल नहीं करना चाहती थी। इसी संगठन में पहले भी मैंने कई वरिष्ठ नेताओं के साथ काम किया है, जिन्होंने महिलाओं का सम्मान किया है और कभी कोई गलत अनुभव नहीं हुआ। लेकिन आज के समय में स्थिति बदल गई है, जिससे महिलाएं असुरक्षित महसूस कर रही हैं। मैं यह स्पष्ट करना चाहती हूं कि मैं डरने वाली नहीं हूं और न ही चुप बैठूंगी। मैं सच के लिए अपनी लड़ाई जारी रखूंगी।

10 साल से भाजपा में हैं दीपाली

दीपाली तिवारी पिछले 10 वर्षों से भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उनका मायका कौशांबी जनपद में है, जहां उनके दादा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे हैं। कौशांबी जिले की चायल विधानसभा से उनके दादा श्री मंगला प्रसाद तिवारी उर्फ जर्मन मास्टर विधायक भी रहे थे, जो करीब पांच दशक पुरानी बात है। उनके पति शशांक तिवारी पूर्व में मंडी परिषद में ठेकेदारी का कार्य करते थे, जो अब नहीं करते हैं। दीपाली तिवारी पार्टी में रहते हुए पूर्व में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की जिला संयोजिका रही हैं और पिछले लगभग 9 वर्षों से जिला मंत्री के पद पर कार्यरत थीं।

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