यूरोप : 43 डिग्री टॉर्चर के बाद अमेरिका को पिघलाने पर आमादा हुआ सूरज
दुनिया के कई हिस्सों में इस समय भीषण गर्मी लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है. यूरोप में किस तरह का हाहाकार मचा हुआ है, वो तो हर कोई देख रहा है. सड़कें पिघल रही हैं, लोग पानी में कूद-कूदकर गर्मी से छुटकारा पा रहे हैं और तो और रेलवे ट्रैक तक टेढ़े हो रहे हैं. ये सारा माहौल 40-43 डिग्री की गर्मी पर ही बना हुआ है क्योंकि फ्रांस-जर्मनी-इटली जैसे देशों में लोग इस तापमान के आदी नहीं हैं. गर्म हवाएं जानलेवा हुई जा रही हैं और अस्पतालों में लू लगने के बाद मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है. बुजुर्गों की तो जान भी जा रही है. यूरोप तो ट्रेलर है, अब यही हाल अमेरिका में भी होने वाला है.
मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अमेरिका के मध्य और पूर्वी हिस्सों में आने वाले दिनों में तेज गर्मी और उमस का दौर शुरू होगा, जिससे करोड़ों लोग प्रभावित हो सकते हैं. अमेरिका की नेशनल वेदर सर्विस के मुताबिक मंगलवार से शुरू होने वाली गर्म हवाएं 4 जुलाई तक जारी रह सकती है. इस दौरान कई राज्यों में तापमान 38 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच सकता है. अधिक नमी के कारण लोगों को महसूस होने वाला तापमान इससे भी ज्यादा होगा, जिससे हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाएगा.
अब अमेरिका पर सूरज हुआ लाल
- सबसे बड़ी चिंता यह है कि रात के समय भी लोगों को गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम है. कई इलाकों में रात का तापमान भी काफी ऊंचा रहने का अनुमान है. इससे बुजुर्गों, छोटे बच्चों और पहले से बीमार लोगों के लिए खतरा और बढ़ जाता है.
- अमेरिकी प्रशासन ने लोगों से बार-बार पानी पीने, दोपहर के समय धूप में कम निकलने और अपने आसपास रहने वाले बुजुर्गों और जरूरतमंद लोगों का हालचाल लेने की अपील की है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है.
- यह हीटवेव ऐसे समय आ रही है जब अमेरिका में इंडिपेंडेंस डे के बड़े समारोह आयोजित होने वाले हैं. राजधानी वॉशिंगटन सहित कई शहरों में बड़ी संख्या में लोग आतिशबाजी और अन्य कार्यक्रमों में शामिल होंगे. इसके अलावा फुटबॉल विश्व कप के नॉकआउट मुकाबलों के कारण भी कई शहरों में भारी भीड़ जुटने की संभावना है. ऐसे में प्रशासन के सामने लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती होगी
इससे पहले यूरोप भी भीषण गर्मी की चपेट में आ चुका है. हाल के दिनों में वहां रिकॉर्ड तापमान दर्ज किया गया और कई देशों में हालात बेहद गंभीर हो गए. रिपोर्टों के मुताबिक जून के अंत से अब तक 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतें गर्मी से जुड़ी घटनाओं के कारण हुई हैं। कई लोगों की मौत लू, पानी में डूबने और अत्यधिक गर्म वाहनों में फंसने जैसी घटनाओं में हुई. जर्मनी, पोलैंड और चेक गणराज्य जैसे देशों में तापमान ने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए, जबकि बाल्कन क्षेत्र के कई हिस्सों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया. तेज गर्मी के कारण जंगलों में आग लगी, बिजली और परिवहन व्यवस्था पर दबाव बढ़ा तथा कई जगह आपातकालीन चेतावनियां जारी करनी पड़ीं.
विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोप के बाद अब अमेरिका में बढ़ती हीटवेव यह संकेत दे रही है कि चरम मौसम की घटनाएं लगातार गंभीर होती जा रही हैं. ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने के साथ-साथ सरकारों को भी लंबे समय की तैयारी और प्रभावी प्रबंधन पर अधिक ध्यान देना होगा.वैज्ञानिकों का मानना है कि गर्मी के पीछे जलवायु परिवर्तन की बात से इनकार नहीं किया जा सकता. साल दर साल इसी वजह से गर्मी बढ़ रही है और इसका सामना करने के लिए अब आदत डालनी होगी. इसके अलावा समय रहते इसके उपाय भी करने होंगे.

