जोजिला दर्रे पर अब चाहे बर्फ गिरे या बम, सेना थमेगी नहीं
Zojila Tunnel: कारगिल युद्ध के दौरान चोटियों पर बैठी पाकिस्तानी सेना की पूरी कोशिश थी कि वह किसी भी तरह से इस रास्ते को अपने कब्जे में ले ले. पाकिस्तान को अच्छी तरह से पता था कि इस रास्ते पर उसक कब्जा हो गया तो भारत के लेह और लद्दाख का इलाका पूरी तरह से कट जाएगा. ऐसे में भारतीय सेना चाह कर भी लेह और लद्दाख में अपनी सैन्य मदद नहीं पहुंचा सकेगी और वह आसानी ने इस हिस्से पर कब्जा कर लेगा. हालांकि असंभव सी दिखने वाली तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए भारतीय सेना ने पाकिस्तान को अपने पैर खीचने के लिए मजबूर कर दिया था. अब इसी रास्ते से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है.
भारत सरकार ने इस रास्ते पर कुछ ऐसा इंतजाम कर दिया है कि पाकिस्तान चाहे बम बरसाए या फिर सर्दियों के मौसम में जबरदस्त बर्फ बारी हो. किसी भी कीमत में भारतीय सेना के कदम इस रास्ते पर नहीं रुकेंगें. दरअसल, यहां पर हम जोजिले दर्रे के दिल को चीर कर बनाई गई टनल की बात कर रहे हैं. जोजिला टनल प्रोजेक्ट में बड़ा मुकाम हासिल करते हुए दर्रे के नीचे बन रही सुरंग के दोनों सिरों को सफलतापूर्वक जोड़ दिया गया है. इसके साथ ही 13 किलोमीटर लंबी टनल का मुख्य मार्ग लगभग पूरी तरह से तैयार हो गया है. इस टनल का काम पूरा होने के बाद कश्मीर और लद्दाख के बीच सालभर आवागमन जारी रखा जा सकेगा.
- करीब 6,500 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस प्रोजेक्ट का निर्माण नेशनल हाईवे एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) कर रहा है. फिलहाल जोजिला दर्रा भारी बर्फबारी और खराब मौसम के कारण हर साल कई दिनों तक बंद रहता है.
- सर्दियों में यहां का तापमान माइनस 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. सड़कों पर जमी कई फुट बफ की वजह से लद्दाख का संपर्क सर्दियों के दौरान कश्मीर घाटी से कट जाता था. पहले यह दर्रा हर साल लगभग 160 से 180 दिनों तक बंद रहता था.
- हालांकि हाल के वर्षों में बर्फ हटाने और सड़क रखरखाव के बेहतर इंतजामों से यह समयावधि में काफी कमी हुई है. इसके बावजूद 2024 में 35 दिन, 2025 में 32 दिन और 2026 में 73 दिन तक यह रास्ता बंद रहा.
- जोजिला टनल के शुरू होने के बाद यह समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी. सुरंग के जरिए पूरे साल लद्दाख तक आवागमन संभव हो सकेगा. इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ सेना को भी बड़ी राहत मिलेगी.
- आपको बता दें कि श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग भारतीय सेना के लिए बेहद अहम है. इसी मार्ग के जरिए लद्दाख, सियाचिन ग्लेशियर और चीन सीमा के पास तैनात सैनिकों तक जरूरी सामान, हथियार और अन्य संसाधन पहुंचाए जाते हैं.
- वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने इसी राजमार्ग को निशाना बनाकर भारत की सैन्य आपूर्ति व्यवस्था को बाधित करने की कोशिश की थी. इसलिए रक्षा विशेषज्ञ इस मार्ग को रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानते हैं.
- टनल बनने के बाद सेना की आवाजाही और आपूर्ति व्यवस्था पहले से कहीं अधिक आसान और तेज हो जाएगी. किसी भी आपात स्थिति में सैनिकों और सैन्य उपकरणों को सीमावर्ती क्षेत्रों तक तेजी से पहुंचाया जा सकेगा
- Whether snow falls or bombs drop on Zoji La Pass, the Army will not stop.

