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अमेरिका में दशकों बाद लौटा मांस खाने वाला खतरनाक कीड़ा!

साउथ टेक्सास: अमेरिका में दशकों बाद मांस खाने वाला परजीवी ‘न्यू वर्ल्ड स्क्रू-वर्म’ पाया गया है. इस खबर ने अमेरिकी प्रशासन और पशुपालकों की नींद उड़ा दी है. यह एक ऐसा कीड़ा है जिसके लार्वा गर्म खून वाले जानवरों के टिशू यानी जिंदा मांस को अपना भोजन बनाते हैं. यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर (यूएसडीए) ने बुधवार को इस खौफनाक परजीवी के मिलने की पुष्टि की है. यह कोई फूड सेफ्टी का मामला नहीं है. लेकिन इससे फूड प्रोडक्शन पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है. इस कीड़े की वजह से अमेरिकी इकोनॉमी को अरबों डॉलर का नुकसान झेलना पड़ सकता है. अमेरिका में पहले से ही महंगाई चरम पर है. अब इस आउटब्रेक से बीफ की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है. सरकार ने इस परजीवी को खत्म करने के लिए तुरंत एक्शन लिया है.

यूएसडीए की नेशनल वेटरनरी सर्विसेज लैबोरेटरीज ने एक सैंपल की टेस्टिंग की थी. यह लैब आयोवा के एम्स में स्थित है. यह खास सैंपल टेक्सास के ला प्रायर में एक तीन हफ्ते के बछड़े से लिया गया था. बुधवार को इसकी रिपोर्ट में न्यू वर्ल्ड स्क्रू-वर्म होने की पुष्टि हुई है. इसके बाद से ग्राउंड पर मौजूद सरकारी टीमों को तुरंत अलर्ट कर दिया गया है. 20 किलोमीटर के इन्फेक्टेड जोन में सख्ती काफी बढ़ा दी गई है. इलाके में क्वारंटीन और मूवमेंट कंट्रोल भी लागू कर दिया गया है. इसके साथ ही बड़े पैमाने पर सर्विलांस किया जा रहा है. प्रशासन यहां भारी संख्या में स्टेराइल यानी बांझ मक्खियों को भी लगातार छोड़ रहा है. इससे फर्टाइल मक्खियों की आबादी को बढ़ने से आसानी से रोका जा सकेगा.

यूएसडीए सेक्रेटरी ब्रुक रोलिंस ने बुधवार रात एक ब्रीफिंग में इसके बारे में जानकारी दी. रोलिंस ने कहा, ‘अगर हम सब मिलकर काम करें और एनिमल ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल का पालन करें तो यह परजीवी हमारे देश में जगह नहीं बना पाएगा’. रोलिंस ने इसे ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन का बड़ा प्रयास बताया है. उन्होंने कहा कि हमारी टीमों ने इस मक्खी को एक साल तक टेक्सास से दूर रखा जिससे हमें आज की तैयारी का वक्त मिल गया. आपको बता दें कि अमेरिका में दशकों पहले इस कीड़े को खत्म घोषित कर दिया गया था. यह बड़ी सफलता बांझ मक्खियों की ब्रीडिंग और अवेयरनेस कैंपेन के जरिए मिली थी. लेकिन साउथ अमेरिका में हाल ही में इसके मामले बहुत तेजी से बढ़े हैं. पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स इस स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं.

स्क्रू-वर्म कोई छूत की बीमारी नहीं है जो एक जानवर से दूसरे में फैले. इसकी एडल्ट मादा मक्खियां गर्म खून वाले जानवरों के ताजे घावों में अपने अंडे देती हैं. अंडों से निकलने वाले लार्वा होस्ट के शरीर का जिंदा मांस खाते हैं. यह प्रक्रिया जानवरों के अहम अंगों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है. इससे बहुत ही गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन भी हो सकता है. कुछ मामलों में यह इतना खतरनाक होता है कि होस्ट जानवर की तड़पकर मौत भी हो सकती है. यह वाइल्डलाइफ और पालतू जानवरों के लिए भी एक बड़ा खतरा है. टेक्सास और न्यू मैक्सिको के वेट्स को नए इन्फेक्शन को लेकर पूरी तरह अलर्ट रहने को कहा गया है. रोलिंस ने पालतू जानवरों के मालिकों से भी ज्यादा सावधानी बरतने की अपील की है.

इंसानों में इसके मामले बहुत ही कम देखने को मिलते हैं. लेकिन अगर इन्फेक्शन हो जाए तो यह सीधा जानलेवा हो सकता है. अमेरिका में किसी इंसान में स्क्रू-वर्म का आखिरी मामला अगस्त में मैरीलैंड में मिला था. वह एक ट्रैवल से जुड़ा केस था और मरीज इलाज के बाद पूरी तरह ठीक हो गया था. ब्रुक रोलिंस ने बताया कि अभी इंसानों की सेहत को इससे बहुत कम खतरा है. इस परजीवी से फूड सेफ्टी का कोई बड़ा रिस्क नहीं है. लेकिन उन्होंने माना कि यह हमारे पशुधन के लिए एक बहुत ही गंभीर खतरा है. अगर पशुओं में यह बीमारी फैलती है तो हालात बेकाबू हो सकते हैं. इसलिए प्रशासन हर स्तर पर सुरक्षा को यकीनी बना रहा है.

ऐसे लोग जो पशुओं के साथ काम करते हैं उन्हें इसका सबसे ज्यादा खतरा है. जो लोग ज्यादातर समय बाहर बिताते हैं या बाहर सोते हैं उन्हें भी बहुत सावधान रहना चाहिए. जिन लोगों को कोई ऐसी मेडिकल कंडीशन है जिससे खून बहता है वो आसानी से इन्फेक्शन का शिकार हो सकते हैं. शरीर पर खुले घाव वाले लोगों को इन मक्खियों से बचकर रहना चाहिए. यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने भी इसे लेकर अहम चेतावनी दी है. सीडीसी के मुताबिक खरोंच या कीड़े के काटने जैसा छोटा घाव भी इन मक्खियों को अपनी ओर खींच सकता है. अगस्त में ही जानवरों के इलाज के लिए इमरजेंसी दवाओं के इस्तेमाल को मंजूरी दी गई थी. इस ट्रीटमेंट की एक खेप साउथ टेक्सास भेजी जा रही है.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह इन्फेस्टेशन अमेरिका के लिए बहुत बड़ी आर्थिक तबाही ला सकता है. देश में इसका सबसे बुरा आउटब्रेक साल 1972 में हुआ था. तब यूएसडीए के मुताबिक 90 हजार से ज्यादा मामले सामने आए थे. डलास के फेडरल रिजर्व बैंक ने इस खतरे को लेकर एक रिपोर्ट पेश की है. इसके अनुसार ऐसा ही आउटब्रेक दोबारा होने पर अकेले साउथवेस्ट इलाके को तीन अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान हो सकता है. नॉर्थ कैरोलिना स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मैक्स स्कॉट ने इस विषय पर अहम रिसर्च की है. वे जेनेटिक मॉडिफिकेशन के जरिए मक्खियों को बांझ बनाने की तकनीक पर काम करते हैं. उनका कहना है कि इस बीमारी को फैक्ट्री में बांझ मक्खियां तैयार करके ही पूरी तरह से रोका जा सकता है.

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