गाजियाबाद : चलते-फिरते नर्सिंग होम का भंड़ाफोड़, कार में भ्रूण लिंग की जांच
गाजियाबाद में चलती कार में भ्रूण लिंग की जांच और गर्भपात कराने वाले गैंग के चार सदस्यों को पुलिस ने शनिवार देर रात 2 बजे गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन और अन्य उपकरण बरामद किए गए हैं।
गैंग गाजियाबाद, दिल्ली और एनसीआर के अलग-अलग इलाकों में घूमकर कार में ही महिलाओं के गर्भ में पल रहा बच्चा लड़का है या लड़की, इसकी जांच करता था। इसके लिए 8 से 10 हजार रुपए वसूले जाते थे। अगर कोई महिला गर्भपात कराना चाहती, तो उसे नर्सिंग होम ले जाकर झोलाछाप डॉक्टर के जरिए गर्भपात भी कराया जाता था।
शहर कोतवाली क्षेत्र के नालकुआं रोड पर पुलिस ने यह कार्रवाई की। शनिवार रात करीब 12 बजे सीएमओ को मुखबिर से गैंग के बारे में सूचना मिली। इसके बाद सीएमओ के निर्देश पर नोडल अधिकारी की निगरानी में चार सदस्यीय टीम गठित की गई और कोतवाली पुलिस को भी कार्रवाई में शामिल किया गया।
रात 2 बजे UP14FL 9355 नंबर की चलती कार को रोककर तलाशी ली गई। कार में ड्राइवर समेत चार युवक सवार थे। तलाशी के दौरान पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन और अन्य उपकरण बरामद हुए। इसके बाद पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर उपकरण जब्त कर लिए। कोतवाली SHO सचिन बालियान ने बताया कि शनिवार रात करीब 12 बजे सीएमओ को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कुछ लोग चलती कार में भ्रूण लिंग की जांच कर रहे हैं। उन्होंने एक महिला को जांच के लिए नालकुआं रोड पर बुलाया है और 4FL 9355 नंबर की कार में उसका इंतजार कर रहे हैं।
सीएमओ ने रात करीब 12:20 बजे यह सूचना कोतवाली पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। रात करीब 2 बजे कार को रोककर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की पहचान संदीप (35), सलमान (32), शाहिद (29) और तस्लीम (27) के रूप में हुई है। पूछताछ में संदीप ने बताया कि वही गैंग का मास्टरमाइंड है। वह पहले भी भ्रूण लिंग जांच के मामले में जेल जा चुका है।
आरोपी दिल्ली, गाजियाबाद और एनसीआर के अलग-अलग इलाकों में घूमते थे। ग्राहकों से व्हाट्सएप के जरिए संपर्क किया जाता था। भ्रूण लिंग जांच के लिए 8 से 10 हजार रुपए लिए जाते थे और कार में ही अल्ट्रासाउंड कर रिपोर्ट बता दी जाती थी। यदि कोई महिला गर्भपात कराना चाहती थी तो उससे 20 हजार रुपए लेकर अस्थायी नर्सिंग होम में झोलाछाप डॉक्टर के जरिए गर्भपात कराया जाता था।
संदीप ने पूछताछ में बताया कि पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई से बचने के लिए वे कार में ही भ्रूण लिंग की जांच करते थे। ग्राहकों से उनकी आर्थिक स्थिति के अनुसार रकम ली जाती थी। संपन्न परिवारों से अधिक पैसे वसूले जाते थे। डील तय होने के बाद महिला को अस्थायी नर्सिंग होम ले जाकर गर्भपात कराया जाता था।
संदीप ने बताया कि पकड़े जाने से बचने के लिए वे ग्राहकों से केवल व्हाट्सएप कॉल पर बात करते थे। बातचीत पूरी होने के बाद कॉल और चैट का डेटा डिलीट कर देते थे। उसने यह भी बताया कि गैंग का सदस्य सलमान अलग-अलग स्थानों पर जाकर ऐसी महिलाओं से संपर्क करता था, जो भ्रूण लिंग की जांच कराना चाहती थीं। ग्राहकों को लाने की पूरी जिम्मेदारी उसी की थी।

