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लखनऊ : मायावती ने उमाशंकर सिंह के बेटे को लॉन्च किया

बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को लखनऊ में बड़ी बैठक की। इसमें दिवंगत बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के बेटे युकेश सिंह भी शामिल हुए। यह पहली बार है, जब युकेश किसी सियासी कार्यक्रम में दिखे। बैठक में वह सबसे आगे बैठे दिखे। माना जा रहा है, मायावती ने युकेश की औपचारिक पॉलिटिकल लॉन्चिंग कर दी है। वह अपने पिता की रसड़ा (बलिया) सीट से 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं।

यूपी में बसपा के इकलौते विधायक रहे उमाशंकर सिंह (55) का 5 अगस्त को निधन हो गया था। वे लंबे समय से ब्रेन कैंसर से जूझ रहे थे। तब मायावती ने कहा था- “उमाशंकर मुझे अपनी सगी बहन की तरह मानते थे। राजनीति में कई लोगों ने साथ छोड़ा, लेकिन उन्होंने कभी पार्टी को धोखा नहीं दिया। अगर परिवार की इच्छा होगी, तो उनके बेटे को राजनीति में आगे बढ़ने का पूरा अवसर दूंगी। उन्हें वही सम्मान और महत्व दिलाने का प्रयास करूंगी, जो उमाशंकर सिंह को मिला था।

उधर, प्रदेश कार्यालय में सुबह 11 बजे शुरू हुई बैठक करीब डेढ़ घंटे चली। इसमें यूपी के सभी 75 जिलों के जिलाध्यक्ष, मंडल कोऑर्डिनेटर और घोषित विधानसभा प्रभारियों समेत 600 से ज्यादा पदाधिकारी और कार्यकर्ता पहुंचे। हालांकि, मायावती के भतीजे आकाश आनंद बैठक में मौजूद नहीं रहे। बताया गया कि आज की बैठक का फोकस सिर्फ यूपी पर था। ऐसे में आकाश 3 सितंबर को होने वाली बसपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल होंगे।

बैठक में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों, संगठन की जमीनी मजबूती और संभावित प्रत्याशियों के चयन पर चर्चा हुई। इसके साथ ही मायावती ने पिछली बैठकों में दिए गए दिशा-निर्देशों की समीक्षा की। उमाशंकर सिंह बलिया जिले की रसड़ा सीट से 3 बार विधायक रहे थे। परिवार में पत्नी पुष्पा सिंह, बेटी यामिनी और बेटा प्रिंस युकेश हैं। विधायक ने 2024 में युकेश की शादी यूपी सरकार में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह की भतीजी कनिका सिंह से कराई थी। बसपा प्रमुख मायावती भी इस शादी में पहुंची थीं।

युकेश अपने पिता की कंपनी ‘CS इंफ्राकंस्ट्रक्शन लिमिटेड’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) हैं। उमाशंकर के निधन के बाद प्रिंस युकेश को उनकी राजनीतिक विरासत का उत्तराधिकारी माना जा रहा है। हालांकि, अभी तक युकेश कभी एक्टिव पॉलिटिक्स में नहीं दिखे थे।

मायावती की बैठक की 4 बड़ी बातें-

1. महिलाओं को ‘रेवड़ियां’ बांटने पर रोक लगे मायावती ने कहा- भाजपा सरकार चुनाव जीतने के लिए महिलाओं को योजनाओं के नाम पर ‘रेवड़ियां’ बांटकर उन्हें गलत तरीके से प्रभावित कर रही है। इस पर तुरंत रोक लगनी चाहिए। चुनाव के बाद वादों से मुकरना विरोधी दलों की आदत बन चुकी है। यूपी की जनता को इनके झांसे और धोखे से सावधान रहना होगा।

2. ‘जेन जी’ और ‘जेन अल्फा’ का प्रदर्शन वादाखिलाफी का नतीजा ‘जेन जी’ और ‘जेन अल्फा’ का प्रदर्शन राज्य सरकारों की वादाखिलाफी का ही नतीजा है। अगर सरकारें समय पर युवाओं की मांगें पूरी कर देतीं, तो उन्हें सड़कों पर उतरने की जरूरत नहीं पड़ती।

3. महंगाई और बेरोजगारी से बढ़ रहा पलायन उत्तर प्रदेश में महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी और पिछड़ेपन की वजह से युवाओं और आम लोगों का पलायन लगातार बढ़ रहा है। इस बार 9 अक्टूबर को कांशीराम की पुण्यतिथि का कार्यक्रम लखनऊ स्थित कांशीराम स्मारक स्थल पर ही होगा। इसमें पूरे उत्तर प्रदेश से लोग लखनऊ आएंगे।

4. प्रत्याशियों के चयन पर फंसा पेंच सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान पदाधिकारियों ने कमजोर सीटों पर मजबूत और हरसंभव सहयोग करने वाले प्रत्याशी न मिलने की बात रखी। इस पर मायावती ने निर्देश दिया कि फिलहाल जो सबसे बेहतर कर सकता है, उसका नाम फाइनल करें। लेकिन, चुनाव तक अगर कोई उससे बेहतर प्रत्याशी मिलता है, तो सीट का टिकट बदला जा सकता है। नाम न छापने की शर्त पर कुछ नेताओं ने कहा कि अगर अंतिम समय में टिकट कटा और प्रत्याशी ने सवाल किया, तो क्या जवाब देंगे?

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