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मायावती बोलीं–आरक्षण खत्म करने की साजिश कर रहा RSS

बसपा सुप्रीमो मायावती ने मंगलवार को आरक्षण और छात्र-युवा आंदोलनों को लेकर भाजपा, कांग्रेस और सपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी नौकरियों में दलित, आदिवासी और अन्य पिछड़े वर्गों का आरक्षण अब लगभग निष्प्रभावी होता जा रहा है और RSS के लोग इसे और निष्प्रभावी बनाने में लगे हैं।

मायावती ने कहा कि पब्लिक सेक्टर को कमजोर कर लगातार प्राइवेट सेक्टर को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे गरीब और बेरोजगार वर्ग पिछड़ रहा है, जबकि बड़े पूंजीपति और धन्नासेठ मजबूत होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बसपा निजी क्षेत्र के खिलाफ नहीं है, लेकिन सरकारी नौकरियों की तरह निजी क्षेत्र में भी आरक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए।

मायावती ने दावा किया कि बसपा सरकार ने सरकारी सहयोग से स्थापित उद्योगों में भी आरक्षण देने की व्यवस्था लागू की थी।

बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि सत्ता और विपक्ष की अंदरूनी मिलीभगत से दलितों, आदिवासियों और पिछड़े वर्गों को फिर से ‘गुलाम और लाचार’ बनाने की साजिश चल रही है। उन्होंने इन वर्गों से सतर्क और सावधान रहने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें अपने हितों की रक्षा के लिए बसपा से जुड़ना चाहिए और पार्टी को सत्ता में लाना चाहिए।

मायावती ने कहा कि बसपा की सरकारों में सर्वसमाज के किसी वर्ग के साथ भेदभाव और पक्षपात नहीं किया गया। सभी वर्गों का राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक स्तर पर ध्यान रखा गया। मायावती ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक और बेरोजगारी के मुद्दे पर हुए CJP के आंदोलन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि छात्रों, नौजवानों और Gen-Z की समस्याओं से जुड़ा यह आंदोलन गंभीर मुद्दों को उठाता है और बसपा हमेशा छात्र-युवाओं के साथ खड़ी रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि CJP के आंदोलन को कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने हाईजैक कर लिया। अब उसकी आड़ में संसद भी नहीं चल पा रही है।

मायावती ने कहा कि छात्र और युवा अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन जरूर करें, लेकिन उन्हें राजनीतिक दलों के हाथों का मोहरा नहीं बनना चाहिए। मायावती ने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर का आंदोलन की तरह ही झारखंड की राजधानी रांची में भी छात्र और नौजवान अपनी समस्याओं को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि रांची के आंदोलन पर कांग्रेस और उसके समर्थक दल खुलकर नहीं बोल रहे हैं, जबकि अब भाजपा और उसके समर्थक दल छात्रों की आवाज उठाने के लिए आगे आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि भाजपा और उसके समर्थक दलों ने भी इस आंदोलन को हाईजैक कर लिया है।

मायावती के मुताबिक, दिल्ली और रांची दोनों जगह छात्र-युवा आंदोलनों के पीछे उनकी समस्याओं के समाधान से ज्यादा राजनीति दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों में समस्याओं को हल कराने की गंभीरता नहीं है, बल्कि चुनावी स्वार्थ की संकीर्ण राजनीति हावी है। बसपा प्रमुख ने देशभर के छात्रों, नौजवानों और Gen-Z से अपील की कि वे सत्ता और विपक्ष के कथित षड्यंत्र से दूर रहें।

उन्होंने कहा कि युवा अपनी समस्याओं से निपटने के लिए राजनीतिक दलों का सावधानीपूर्वक इस्तेमाल करें, लेकिन अपनी समस्याओं की आड़ में सत्ता और विपक्ष को संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ साधने का मौका न दें।

मायावती ने उत्तर प्रदेश में अपनी चार बार की सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि बसपा ने छात्रों और नौजवानों को कभी निराश नहीं किया।

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने छात्रों की समस्याओं का समय पर निदान किया और युवाओं की ‘रोटी-रोजी’ का विशेष ध्यान रखा। सरकारी और निजी क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए गए।

मायावती ने कहा कि सरकारी भर्तियों पर लंबे समय से लगी रोक को हटाकर लाखों लोगों को रोजगार के साधन दिए गए। पुलिस और अन्य विभागों में नए सरकारी पद सृजित कर भी रोजगार दिया गया।

उन्होंने कहा कि आज पढ़ाई और ट्रेनिंग पूरी करने के बाद छात्र-युवा रोजगार चाहते हैं, लेकिन केंद्र और राज्यों की विभिन्न सरकारें उनकी यह जरूरत पूरी नहीं कर पा रही हैं। इसी वजह से युवाओं में जबरदस्त रोष है।

मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। उन्होंने सर्वसमाज के लोगों से बसपा को मजबूत और सफल बनाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि छात्र, नौजवान, दलित, आदिवासी, पिछड़े, मुस्लिम और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक, किसान, मजदूर, व्यापारी, कर्मचारी और अन्य मेहनतकश वर्ग खुशहाल जिंदगी जी सकें, इसके लिए बसपा को मजबूत करना जरूरी है।

मायावती ने कहा कि बसपा ने यूपी में अपनी 4 बार की सरकार ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति पर चलाई और सर्वसमाज के साथ बिना भेदभाव काम किया।

Umh News india

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