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मेरठ : पति को सांप डसवाने वाली को करैत कहां से मिला

पति अतुल को करैत सांप से डसवाकर हत्या करने वाली दामिनी प्रेमी तुषार के साथ फिलहाल जिला जेल में बंद है। दामिनी-तुषार ने जिस करैत सांप से अतुल की हत्या की, उसका नाम सुनकर तो सपेरे भी घबरा गए।

सपेरों की बस्ती में रहने वालों ने कहा कि इतना जहरीला सांप तो सपेरे भी नहीं पकड़ते। जिसने भी यह सांप दिया है, उसने नशे में सांप पकड़कर दिया होगा। या फिर कोई बहुत हिम्मतवाला होगा। करैत सांप इतना जहरीला है कि 100 में से एक-दो सपेरे ही इसे पकड़ने की हिम्मत जुटा पाएंगे।

मेरठ जिला मुख्यालय से करीब 40 किमी दूर बहसूमा में सपेरों की बस्ती है। सपेरों की यह बस्ती पिछले 40 साल से आबाद है। बस्ती में करीब 50 घर हैं, जहां 500 से ज्यादा लोग रहते हैं। ये सभी पेशेवर सपेरे हैं। सपेरा जाति के इन लोगों का असली काम तो सांप पकड़ना और बीन बजाना है।

बस्ती में मकान पक्के बने हैं। लोगों के पास भेड़-बकरी हैं, जिन्हें वो चराते हैं। बस्ती के ज्यादातर बच्चे खेल रहे थे। कुछ लड़के घूम रहे थे और महिलाएं अपने कामों में लगी थीं। बुजुर्ग औरतें घरों के बाहर बैठी थीं। कुछ महिलाएं भेड़-बकरी चराने ले जा रही थीं। पुरुष मजदूरी करने गए थे। बस्ती में रहने वाली महिला कारी ने बताया- करैत सांप तो अच्छे से अच्छा सपेरा भी नहीं पकड़ता। इसे हाथ नहीं लगाता। क्योंकि ये इतना खतरनाक और जहरीला सांप है कि सपेरे भी घबराते हैं। पता नहीं दामिनी-तुषार ने ये सांप कहां से लिया है?

अगर किसी सपेरे ने ये सांप दिया है, तो वो बहुत हिम्मतवाला बड़ा सपेरा होगा। ये सांप तुरंत काट लेता है और इसमें जहर भी बहुत होता है। पुराना सांप किसी के पास रखा रहा होगा, तभी उसने ये सांप दिया होगा। घोड़ापछाड़ जैसा सांप तो पकड़ा जा सकता है, लेकिन करैत पकड़ना आसान नहीं है। भेड़-बकरी चराने ले जा रही महिला राजकुमारी ने बताया- मेरा बचपन इसी बस्ती में गुजरा है। मेरा जन्म भी यहीं हुआ। हम सांप रखते ही नहीं हैं। पहले लोग सांप पकड़ते थे, लेकिन अब सरकार ने सांप रखना, पकड़ना, तमाशा दिखाना पूरी तरह बैन कर रखा है। इसलिए हम भी नहीं पकड़ते।

दिहाड़ी मजदूरी करके या शादी में बीन बजाने से जो मजदूरी मिलती है, उसी से हमारा घर चलता है। बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। बाकी सरकारी योजनाओं का लाभ मिल जाता है। घर भी सरकारी योजना से मिला है। बाकी चूनी-आटा मांगकर खाते हैं, उसी से जिंदगी कट रही है।

70 साल के बुजुर्ग सपेरे धर्म सिंह ने बताया- जो नाम आ रहा है कि करैत सांप सपेरों ने दिया है, ये बिल्कुल गलत है। सोनू और उदय को हमारी पूरी बस्ती में कोई नहीं जानता। इन्होंने कहां से सांप लिया होगा, ये भी पुलिस जांच कर रही है। हो सकता है कि ये सांप सपेरों से न लेकर दूसरों से लिया हो। आरोप सपेरों की बस्ती पर मढ़ा जा रहा है। क्योंकि, बंगाली भी फर्जी सपेरे बनकर सांप बेचते हैं। बंगाली भी नाम बदनाम करने को सपेरे बन जाते हैं।

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