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महाराष्ट्र का अनोखा गांव: दशहरे पर यहां जलाया नहीं जाता रावण, 300 साल पुरानी परंपरा

Vijayadashami 2026: आज देश के कई हिस्सों में विजयादशमी यानी दशहरे का पर्व मनाया जा रहा है. विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था. वहीं देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय को भी इस पर्व से जोड़कर देखा जाता है. भारत के अलग-अलग हिस्सों में विजयादशमी और रावण दहन को लेकर कई अनोखी परंपराएं और प्रथाएं प्रचलित हैं. कई जगहों पर रावण दहन की परंपरा नहीं होती, बल्कि इसके बजाय रावण की पूजा की जाती है. इन स्थानों में महाराष्ट्र के अकोला जिले का सांगोला गांव भी शामिल है. आइए जानते हैं दशहरे के दिन यहां क्या होता है…

दशहरे के दिन रावण की पूजा
अकोला से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित गांव में एक ही पत्थर से बनी रावण की मूर्ति है, जिसमें उसे दस सिरों वाले राजा के रूप में और हथियारों के साथ दिखाया गया है. इस गांव में दशहरे के दिन रावण का दहन नहीं, बल्कि उसकी पूजा और महाआरती की जाती है. गांव में रावण की पूजा करने के पीछे ग्रामीणों का मानना है कि रावण में जहां कुछ दुर्गुण थे, वहीं उसमें कई सद्गुण भी मौजूद थे. इसलिए रावण को सिर्फ घृणा की दृष्टि से देखने के बजाय, उसके दुर्गुणों को छोड़कर उसके अच्छे गुणों को अपनाना चाहिए. रावण के अच्छे गुणों को स्वीकार करते हुए यहां के ग्रामीण परंपरागत रूप से उसकी पूजा करते आ रहे हैं.

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