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बंगाल के मुर्शिदाबाद में वोटों के बीच फेंके गए देसी बम, मतदान के बीच मची भगदड़

पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र के महापर्व यानी विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के दौरान हिंसा का नंगा नाच देखने को मिला है. मुर्शिदाबाद जिले के नौदा (Nowda) विधानसभा क्षेत्र में गुरुवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब अज्ञात बदमाशों ने अचानक देशी बमों से हमला कर दिया. इस धमाके की गूंज से न केवल पूरा इलाका दहल गया, बल्कि वोट डालने आए मतदाताओं के बीच भी भगदड़ मच गई. मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, यह हमला एक भीड़भाड़ वाले रास्ते पर किया गया, जिससे वहां मौजूद कई लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए हैं. घायलों की चीख-पुकार और सड़क पर बिखरे खून के धब्बों ने इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है. चुनाव आयोग और प्रशासन के दावों के बीच हुई इस बमबारी ने बंगाल की चुनावी शुचिता और सुरक्षा पर एक बार फिर गहरा दाग लगा दिया है.

पश्चिम बंगाल का मुर्शिदाबाद जिला हमेशा से अपनी संवेदनशीलता के लिए जाना जाता है, लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव में जो कुछ भी नौदा में हुआ, उसने सभी को सन्न कर दिया है. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मतदान केंद्र से महज कुछ ही दूरी पर अज्ञात बदमाशों ने एक के बाद एक कई देशी बम फेंके. बम फटते ही धुएं का गुबार छा गया और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे. मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, हमलावर अंधेरे का फायदा उठाकर या गलियों के रास्ते आए थे और उन्होंने जानबूझकर उस समय को चुना जब लोग भारी संख्या में मतदान के लिए घर से बाहर निकल रहे थे. इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें धमाके के बाद की भयावहता को साफ देखा जा सकता है.

नौदा में हुए इस बम हमले में घायलों की संख्या को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि तो नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय सूत्रों का कहना है कि करीब आधा दर्जन लोग इसकी चपेट में आए हैं. घायलों में महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं जो शांतिपूर्ण तरीके से अपना वोट डालने आए थे. धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कुछ लोगों के शरीर के अंगों पर गहरे जख्म आए हैं. मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से घायलों को आमतला ग्रामीण अस्पताल और अन्य नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में ले जाया गया. अस्पताल के बाहर भी लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.

राजनीतिक दलों में शुरू हुआ आरोप-प्रत्यारोप
जैसे ही नौदा में बमबारी की खबर फैली, राज्य की राजनीति में उबाल आ गया. सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और विपक्षी दलों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, स्थानीय टीएमसी नेताओं ने इस हमले के पीछे विपक्षी दलों के समर्थकों का हाथ बताया है. उनका आरोप है कि मतदाताओं को डराने और पोलिंग एजेंटों को बूथ से भगाने के लिए यह साजिश रची गई है. वहीं दूसरी ओर, बीजेपी और अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि टीएमसी के कार्यकर्ता हार के डर से हिंसा का सहारा ले रहे हैं. चुनाव आयोग ने इस मामले पर रिपोर्ट तलब की है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है.

इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती

बमबारी की घटना के बाद नौदा और आसपास के क्षेत्रों को छावनी में तब्दील कर दिया गया है. अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) ने स्थानीय प्रशासन को उपद्रवियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए हैं. मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, पुलिस अब उन संदिग्धों की तलाश में जुटी है जो इस बमबारी के पीछे मास्टरमाइंड हो सकते हैं. पुलिस का कहना है कि कुछ जगहों से बिना फटे बम भी बरामद किए गए हैं, जिन्हें निष्क्रिय करने के लिए बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया है. प्रशासन का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है और मतदान दोबारा शांतिपूर्ण तरीके से शुरू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, हालांकि मतदाताओं के मन में अभी भी डर बैठा हुआ है.

पश्चिम बंगाल में चुनावों के दौरान बमबाजी और हिंसा की खबरें नई नहीं हैं, लेकिन 2026 के चुनाव में उम्मीद की जा रही थी कि सुरक्षा के कड़े इंतजामों के कारण ऐसी घटनाएं नहीं होंगी. मुर्शिदाबाद का नौदा इलाका पिछले कई हफ्तों से चर्चा में था क्योंकि यहां लगातार बम बरामद होने की खबरें आ रही थीं. मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, चुनाव से पहले भी यहां भारी मात्रा में विस्फोटक पकड़े गए थे. अब मतदान के दिन हुई इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि चुनावी रंजिश की जड़ें कितनी गहरी हैं. लोग सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक बंगाल की धरती निर्दोषों के खून से लाल होती रहेगी?

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