दरवाजे पर लिखा है जर्जर भवन, प्रवेश निषेध; लेकिन अंदर चल रही OPD
अलवर. अलवर जिले के मालाखेड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की तस्वीरें कई सवाल खड़े कर रही हैं. जिस भवन के बाहर बड़े अक्षरों में “जर्जर भवन, प्रवेश निषेध” का बोर्ड लगा है, उसी इमारत के अंदर हर दिन सैकड़ों मरीज इलाज कराने पहुंच रहे हैं. यहीं OPD चल रही है, एक्स-रे हो रहे हैं, जच्चा-बच्चा वार्ड भी इसी भवन में है और बरामदों तक में मरीजों की आवाजाही बनी रहती है. हैरानी की बात यह है कि इस भवन को सार्वजनिक निर्माण विभाग और चिकित्सा विभाग करीब दो साल पहले ही अनुपयोगी और जर्जर घोषित कर चुके हैं.
अस्पताल प्रशासन के अनुसार भवन का निचला हिस्सा करीब 40 साल पुराना है, जबकि ऊपर का हिस्सा करीब 26 साल पहले बनाया गया था. समय के साथ इमारत इतनी कमजोर हो चुकी है कि इसे उपयोग के लायक नहीं माना गया. इसके बावजूद अस्पताल की कई जरूरी सेवाएं आज भी इसी भवन से संचालित हो रही हैं.
कई बार गिर चुका है छत का प्लास्टर
अस्पताल में काम करने वाले कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के अनुसार छत से प्लास्टर गिरने की घटनाएं पहले भी कई बार हो चुकी हैं. भवन की दीवारों से पपड़ी झड़ रही है. कई जगह छत टूट चुकी है. वीडियो में भी भवन की खराब हालत साफ दिखाई दे रही है. सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि इसी इमारत में मरीज, उनके परिजन और चिकित्सा कर्मी रोज घंटों तक मौजूद रहते हैं
भवन के मुख्य दरवाजे पर “जर्जर भवन, प्रवेश निषेध” का बोर्ड लगा हुआ है. लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आती है. अस्पताल आने वाले मरीज उसी भवन में इलाज कराने मजबूर हैं. बरामदों में भी मरीज बैठते हैं और अस्पताल की नियमित गतिविधियां लगातार चल रही हैं. मामले को लेकर सीएचसी प्रभारी डॉ. लोकेश मीणा ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र भी लिखा है. पत्र में उन्होंने भवन की खराब हालत का जिक्र करते हुए बताया कि निचला भवन 40 साल पुराना और ऊपरी हिस्सा 26 साल पुराना है. उन्होंने भवन को लेकर चिंता जताई और जरूरी कदम उठाने की मांग की.
चिकित्सा विभाग और सार्वजनिक निर्माण विभाग पहले ही इस भवन को जर्जर घोषित कर चुके हैं. इसके बावजूद अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है. अस्पताल का काम उसी इमारत में जारी है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही व्यवस्था बदलेगी. फिलहाल मालाखेड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीज, उनके परिजन और अस्पताल का स्टाफ हर दिन उसी भवन में जा रहे हैं, जिसे दो साल पहले ही असुरक्षित माना जा चुका है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि जिम्मेदार विभाग कोई कदम कब उठाते हैं.

