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फर्जी डॉक्‍यूमेंट से उठा लिया 1000 करोड़ का सरकारी ठेका

दिल्‍ली. सरकारी विभागों में भ्रष्‍टाचार का खेल किस कदर होता है, इसकी एक बानगी गोवा के लोक निर्माण विभाग में भी देखने को मिली. मुख्‍यमंत्री प्रमोद सावंत के राज में एक निजी ठेकेदार ने पहले तो फर्जी डॉक्‍यूमेंट के सहारे कॉन्‍ट्रैक्‍ट की पात्रता हासिल की और फिर 1,000 करोड़ रुपये का सरकारी ठेका उठा लिया. इतने बड़े ठेके में हुई इस अनियमितता का खुलासा होने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है और आनन-फानन में मामले की जांच भी शुरू कर दी गई है.

सिविल इंजीनियर और PWD ठेकेदार मनोज एस पाई डुकले ने मामले की शिकायत की है. उन्‍होंने बताया कि निजी फर्म बगकिया कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड ने कथित तौर पर फर्जी या भ्रामक वर्क कम्‍पलीशन सर्टिफिकेट के आधार पर क्लास IAA (सुपर) ठेकेदार के रूप में पंजीकरण हासिल कर लिया. यह श्रेणी गोवा PWD में कॉन्‍ट्रैक्‍ट के लिए सबसे ऊंची मानी जाती है. शिकायत में यह भी कहा गया है कि कर्नाटक नीरावरी निगम लिमिटेड के तहत पूरे किए गए ‘मुदी टैंक फिलिंग स्कीम’ से जुड़े दस्तावेजों में भी विसंगतियां पाई गईं हैं. एक स्‍थानीय रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गोवा में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के सरकारी ठेकों के आवंटन में भयंकर अनियमितताएं सामने आई हैं. यहां एक निजी निर्माण कंपनी ने राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) में कथित तौर पर हेरफेर किए गए दस्तावेज जमा कर पहले तो बड़े टेंडरों के लिए पात्रता हासिल की और फिर करीब 1,000 करोड़ रुपये का सरकारी ठेका उठा लिया. अब यह टेंडर विवाद मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के लिए नया विवाद बन चुका है. हालांकि, विभाग ने अपने स्‍तर से मामले जांच भी शुरू कर दी है.

मामले के शिकायतकर्ता डुकले ने दावा किया है कि एक ही परियोजना के लिए वर्क कम्‍पलीशन सर्टिफिकेट के तीन अलग-अलग संस्करण गोवा अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए गए, जिससे विभाग द्वारा अपनाई गई सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं. आरोप है कि 11 दिसंबर 2019 के मूल ज्‍वाइंट वेंचर समझौते में किसी अन्य कंपनी को प्रमुख भागीदार बताया गया था, जबकि बगकिया कंस्ट्रक्शंस को केवल सहयोगी भागीदार के रूप में दर्शाया गया था. अब इसी कंपनी के नाम पर पूरा कॉन्‍ट्रैक्‍ट उठाया जा रहा है.

एक अन्य शिकायत कथित तौर पर कर्नाटक के शिवमोगा जिले में 51.19 करोड़ रुपये की अक्का महादेवी मेमोरियल परियोजना से संबंधित है. डुकले का आरोप है कि यह परियोजना चरणबद्ध टेंडर के जरिये पूरी की गई थी. लिहाजा इसे पंजीकरण के लिए सिंगल वर्क कम्‍लीशन नहीं माना जा सकता है. शिकायतों में गोवा PWD/WRD-2020 के संशोधित ठेकेदार पंजीकरण नियमों की धारा 18.1 का भी हवाला दिया गया है. इस धारा के तहत ज्‍वाइंट वेंचर में प्राप्त अनुभव का दावा अलग-अलग भागीदार स्वतंत्र रूप से नहीं कर सकते.

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