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होर्मुज हो जाएगा सूना, अमेरिका के सताए 2 देशों ने खोला पुराना रास्ता, धड़ाधड़ निकलेंगे टैंकर

तेहरान: होर्मुज पर अमेरिका और ईरान के बीच घमासान मचा हुआ है और पूरी दुनिया पिस रही है. तेल की किल्लत और बढ़ती कीमतों के बीच होर्मुज का मसला हल होता नहीं दिखाई दे रहा है. इस बीच अमेरिका के सताए हुए दो देशों इराक और सीरिया ने होर्मुज का विकल्प निकाल लिया है. बताया जा रहा है कि ये नया रास्ता अब तेल की लाइफलाइन साबित होने वाला है. इराक और सीरिया के बीच खुला यह नया बॉर्डर क्रॉसिंग दुनिया के लिए सिर्फ एक रास्ता नहीं, बल्कि तेल की ग्लोबल पॉलिटिक्स में एक बहुत बड़ा मोड़ साबित हो सकता है.

इराक-सीरिया का नया ‘ऑयल गेटवे’

इराक और सीरिया ने मिलकर ‘राबिया-यरुबिया’ बॉर्डर क्रॉसिंग को फिर से शुरू किया है. ये क्रॉसिंग 2011 में सीरियाई गृहयुद्ध के बाद से बंद थी और बाद में इस पर ISIS का कब्जा हो गया था. अब इसे फिर से खोलना एक बड़ी कामयाबी है.

जमीन से व्यापार: यह रास्ता समुद्र के बजाय जमीन के जरिए तेल और सामान भेजने की सुविधा देता है. इससे होर्मुज जैसे खतरनाक समुद्री रास्तों पर निर्भरता कम होगी

सुरक्षित विकल्प: सीरियाई अधिकारियों का मानना है कि ये रूट युद्ध के दौरान भी तेल निर्यात के लिए एक सुरक्षित रास्ता साबित हो सकता है.

होर्मुज का विकल्प होगा ये इराक-सीरिया का रास्ता?

अगर होर्मुज का रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है तो इराक और सीरिया का यह नया रूट न केवल इन देशों की किस्मत बदल सकता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की भारी कमी को रोकने में भी मदद कर सकता है.

इराक के निनेवे प्रांतीय परिषद की सदस्य नादिया अल-जुबूरी के मुताबिक, ये क्रॉसिंग ‘व्यापार के आदान-प्रदान और तेल परिवहन के लिए एक महान प्रवेश द्वार’ बनेगा.

अमेरिका के सताए दो देश निकले हीरो

दिलचस्प बात ये भी है कि तेल का नया रूट निकालने वाले ये दो देश अमेरिका के सताए हुए हैं. इराक के मामले में ‘सताए जाने’ की बात अक्सर 2003 के अमेरिकी आक्रमण से जोड़कर देखी जाती है. सालों तक चली आर्थिक पाबंदियों की वजह से वहां की आम जनता को गरीबी और दवाइयों की कमी जैसी भारी मुश्किलें झेलनी पड़ीं.

सीरिया में अमेरिका ने सीधे तौर पर बड़ी सेना नहीं भेजी लेकिन राजनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर काफी दखल दिया है.

होर्मुज संकट और ईरान-अमेरिका की जिद

अमेरिका और इजरायल के साथ जारी सैन्य संघर्ष के बीच ईरान ने इस रास्ते को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया है. शनिवार रात को ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने साफ कर दिया कि जब तक अमेरिकी नौसैनिक घेराबंदी नहीं हटती, यह रास्ता बंद रहेगा. ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी जहाज की आवाजाही को दुश्मन की मदद माना जाएगा और उसे निशाना बनाया जा सकता है. इससे सैकड़ों जहाज फंस गए हैं. दुनिया का एक-चौथाई तेल इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है. इसके बंद होने का मतलब है कि दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं.

Umh News india

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