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Sultanpur News : मेडिकल कॉलेज में पूर्व प्राचार्य पर चहेते वेंडर को फायदा पहुंचाने के आरोप, बस टेंडर में जालसाजी

सुल्तानपुर राजकीय मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव पर बस टेंडर में जालसाजी और राजस्व को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा है। यह मामला उनके पद से हटने के बाद सामने आया है, जिसमें नियमों का उल्लंघन कर एक चहेते वेंडर को लाभ पहुंचाने की बात कही जा रही है।

जानकारी के अनुसार, संबंधित टेंडर जेम पोर्टल पर प्रकाशित किया गया था। जेम नोटिफिकेशन में 2021 मॉडल या उससे नई, 52 से अधिक सीटों वाली बस की आवश्यकता बताई गई थी, जिसके सभी वैध कागजात होने अनिवार्य थे। हालांकि, टेंडर के साथ संलग्न पीडीएफ में वाहन का पंजीकरण 2020 से पूर्व का न होने की शर्त रखी गई थी, जो एक विसंगति थी।

अनुबंध की अवधि को लेकर भी अनियमितता सामने आई है। पीडीएफ में अनुबंध एक वर्ष का बताया गया था, जिसे संचालक के प्रदर्शन के आधार पर अगले दो वर्ष तक बढ़ाया जा सकता था। जबकि, जेम की गाइडलाइन केवल एक वर्ष के विस्तार की अनुमति देती है।

आरोप है कि यदि टेंडर सीधे दो साल के लिए निकाला जाता, तो बिड वैल्यू और जमानत राशि (बिड वैल्यू का 2% बढ़ जाती। वेंडर को लाभ पहुंचाने के लिए कम अवधि (एक वर्ष) का टेंडर निकाला गया, जिससे राजस्व को नुकसान हुआ।

इस मामले में जिस बस (गाड़ी नंबर UP 65 AR 7602) के लिए टेंडर किया गया था, उसका पंजीकरण दिसंबर 2008 का है। यह बस लगभग 17 वर्ष 4 महीने पुरानी है। इसका फिटनेस 19 मार्च 2026 तक वैध था, लेकिन प्रदूषण प्रमाण पत्र नवंबर 2025 में समाप्त हो चुका था।

सोशल मीडिया पर यह खबर सामने आने के बाद फिटनेस और प्रदूषण प्रमाण पत्र को हाल ही में ठीक कराया गया। यह टेंडर 22 दिसंबर 2025 को जारी किया गया था, जो नियमों के विपरीत था क्योंकि बस की उम्र टेंडर की शर्तों से काफी अधिक थी।

मेडिकल कॉलेज के वर्तमान प्राचार्य प्रियंक वर्मा ने इस संबंध में बताया कि बस कानूनी रूप से वैध थी। उन्होंने कहा कि बीच में बस खराब होने के कारण पुरानी बस का उपयोग किया गया था। वेंडर ने एक महीने के भीतर बस को ठीक कराने का आश्वासन दिया है, अन्यथा टेंडर रद्द कर दिया जाएगा।

Umh News india

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