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स्वाइन फ्लू की खतरनाक आहट

दिल्ली-NCR में फ्लू और वायरल फीवर के बढ़ते मामलों के बीच लोगों के मन में स्वाइन फ्लू को लेकर भी चिंता बढ़ रही है. ऐसे में घबराने के बजाय इसके लक्षण, बचाव और इलाज को समझना जरूरी है. चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. रवि मलिक, फेलिक्स हॉस्पिटल के डॉ. डीके गुप्ता और इंटरनल मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉ. स्वाति माहेश्वरी ने स्वाइन फ्लू को लेकर कई जरूरी बातें साझा कीं. डॉक्टरों के मुताबिक H1N1 यानी स्वाइन फ्लू एक तरह का इन्फ्लुएंजा वायरस है, जो खासतौर पर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में गंभीर परेशानी पैदा कर सकता है.

डॉ. रवि मलिक के मुताबिक स्वाइन फ्लू बच्चों को भी प्रभावित कर सकता है. खासतौर पर 5 साल से छोटे बच्चों में संक्रमण के बाद जटिलताओं का खतरा अधिक हो सकता है. बच्चों के स्कूल और दूसरी भीड़भाड़ वाली जगहों पर संक्रमण फैलने की संभावना रहती है, क्योंकि वे एक-दूसरे के काफी करीब रहते हैं और कई बार हाइजीन का ध्यान नहीं रख पाते. स्कूलों में ग्रुप्स में रहते हैं, तो ऐसे में उनमें ट्रांसमिशन का खतरा सबसे अधिक रहता है. वहीं, 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों और पहले से अस्थमा, COPD, डायबिटीज, हार्ट या किडनी की बीमारी जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को भी अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए. इसके अलावा अगर किसी की आंखें लाल है या छींक रहा है या फिर बुखार है तो कम से कम 1 मीटर की दूरी पर रहें.
अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, कमजोरी और लगातार सूखी खांसी जैसे लक्षण फ्लू में दिखाई दे सकते हैं. अगर लक्षण तेजी से बढ़ रहे हैं तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, ऑक्सीजन का स्तर कम होना, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम की स्थिति, लगातार उल्टी या गंभीर डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है और अपने आप को आइसोलेट करना जरूरी है.

बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेने से बचने की सलाह दी. स्वाइन फ्लू वायरल संक्रमण है, जबकि एंटीबायोटिक्स बैक्टीरियल संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल होती हैं. बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने से साइड इफेक्ट के साथ एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ सकता है. डॉ. रवि मलिक ने भी बताया कि वायरल संक्रमण में बिना जांच और डॉक्टर की सलाह के दवा शुरू नहीं करनी चाहिए. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर टेस्ट के आधार पर आगे का इलाज तय कर सकते हैं.

मुताबिक फ्लू वैक्सीन बीमारी होने के बाद इलाज के तौर पर नहीं लगाई जाती, बल्कि यह बचाव के लिए होती है. 5 साल से कम उम्र के बच्चों के अलावा ऐसे लोग जो पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे हैं, उन्हें फ्लू से बचाव को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. इनमें COPD, अस्थमा, डायबिटीज, हाइपरटेंशन, हृदय रोग, किडनी की बीमारी या ट्रांसप्लांट करा चुके मरीज और कैंसर के मरीज शामिल हैं. डॉक्टर ने बताया कि फ्लू वायरस में बदलाव होते रहते हैं और समय-समय पर नए स्ट्रेन सामने आते हैं. इसलिए इन हाई-रिस्क ग्रुप के लोगों को हर साल डॉक्टर की सलाह के अनुसार फ्लू वैक्सीन लगवानी चाहिए.

अगर कोई व्यक्ति स्वस्थ्य है तो उसे जरूर वैक्सीन लेना चाहिए. गर्भवती महिलाओं को संक्रमण से बचने के लिए भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतनी चाहिए. जरूरत पड़ने पर मास्क का इस्तेमाल करें, हाथों को नियमित रूप से धोएं और बीमार व्यक्ति से दूरी बनाए रखें. गर्भावस्था के दौरान खुद से कोई दवा लेना ठीक नहीं है. इसके अलावा खूब पानी पिएं और खुद को हाइड्रेट करें. सर्दी, खांसी या बुखार होने पर डॉक्टर से संपर्क करना ज्यादा सुरक्षित है. डॉ. डीके गुप्ता ने विटामिन C और दूसरे सप्लीमेंट्स को जरूरत से ज्यादा लेने से बचने की सलाह दी. शरीर को जरूरी पोषक तत्व संतुलित खान-पान से मिलना बेहतर है. मौसमी फल, हरी सब्जियां, पर्याप्त पानी और अच्छी नींद पर ध्यान देना चाहिए. डॉक्टरों के मुताबिक पर्याप्त नींद, हाथों की सफाई, खांसते-छींकते समय मुंह ढकना और बीमार होने पर खुद को आइसोलेट करना संक्रमण के प्रसार को कम करने में मदद कर सकता है.

दिल्ली-NCR में स्वाइन फ्लू को लेकर क्या स्थिति है, आइए जानते हैं ये 5 प्वॉइंट्स…

  • 54% परिवारों में बीमारी के लक्षण: LocalCircles के सर्वे के मुताबिक दिल्ली में 54% परिवार ऐसे हैं, जहां एक या उससे ज्यादा लोग फिलहाल बीमार हैं.
  • हर बीमारी स्वाइन फ्लू नहीं: सर्वे में सामने आए आंकड़ों का यह मतलब नहीं है कि बीमार सभी लोग H1N1 यानी स्वाइन फ्लू से संक्रमित हैं. बारिश के मौसम में सर्दी, खांसी, वायरल फीवर और दूसरे संक्रमण भी आम हैं.
  • लक्षणों से बढ़ी चिंता: सर्दी, खांसी, बुखार और कमजोरी जैसे लक्षणों के कारण लोगों में स्वाइन फ्लू को लेकर डर बढ़ रहा है. हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक बिना जांच के किसी बीमारी को स्वाइन फ्लू मान लेना सही नहीं है.
  • पैनिक की जरूरत नहीं: H1N1 को लेकर घबराने के बजाय सावधानी और सही जानकारी जरूरी है. समय पर डॉक्टर से सलाह, जरूरी जांच और उचित इलाज से गंभीर स्थिति से बचने में मदद मिल सकती है.
  • अस्पतालों की तैयारियों की होगी समीक्षा: बैठक में अस्पतालों में बेड, दवाइयों और मेडिकल सुविधाओं की उपलब्धता का जायजा लिया जाएगा.
Umh News india

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