इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश- NEET UG 2026 का अलॉटमेंट रद्द
NEET Seat Allotment Cancel: उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों में दाखिले का सपना देख रहे हजारों छात्रों को तगड़ा झटका लगा है. इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के सख्त आदेश के बाद, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय (DGME) ने यूपी नीट यूजी-2026 (NEET UG-2026) के तहत सात सितंबर को जारी की गई पहली सीट आवंटन प्रक्रिया को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है. अब राज्य के सरकारी और निजी मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में स्टेट कोटा की सीटों पर एमबीबीएस और बीडीएस में प्रवेश के लिए नए सिरे से काउंसलिंग की जा रही है.
डीजीएमई द्वारा जारी संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, पहले चरण की नई चॉइस फिलिंग शुक्रवार शाम पांच बजे से शुरू हो चुकी है, जो 21 सितंबर की शाम पांच बजे तक चलेगी. छात्रों को इस निर्धारित समय में नए सिरे से अपने विकल्प भरकर लॉक करने होंगे. नए विकल्पों के आधार पर सीट आवंटन का परिणाम 22 सितंबर को घोषित किया जाएगा. जिन अभ्यर्थियों को सीटें मिलेंगी, वे 23 से 26 सितंबर के बीच डीजीएमई की आधिकारिक वेबसाइट से अपना नया आवंटन पत्र डाउनलोड कर संबंधित संस्थान में प्रवेश ले सकेंगे.
पुराना अलॉटमेंट पूरी तरह अमान्य
डीजीएमई की महानिदेशक नेहा शर्मा ने स्पष्ट आदेश जारी किया है कि 7 सितंबर को घोषित किया गया पुराना सीट आवंटन अब पूरी तरह से अमान्य है. जिन छात्रों को पहले सीटें आवंटित हो चुकी थीं, उनके लिए भी यह अनिवार्य है कि वे इस संशोधित काउंसलिंग प्रक्रिया में हिस्सा लें और दोबारा चॉइस फिलिंग कर उसे लॉक करें. जो अभ्यर्थी निर्धारित समय सीमा के भीतर विकल्प नहीं भरेंगे, उन्हें सीट का आवंटन नहीं किया जाएगा. काउंसलिंग की बाकी सभी शर्तें और नियम पहले जैसे ही रहेंगे.
इस पूरी प्रक्रिया के अटकने का मुख्य कारण आरक्षण का एक विवादित पेंच था. दरअसल, समाज कल्याण विभाग की वित्तीय सहायता से चल रहे अंबेडकरनगर, कन्नौज, सहारनपुर और जालौन के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में करीब 91 प्रतिशत आरक्षण लागू कर दिया गया था. इसे लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. इस पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की डिवीजन बेंच ने 91 प्रतिशत आरक्षण पर तत्काल रोक लगा दी. कोर्ट ने अनुसूचित जाति (SC) के लिए 21 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 2 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27 प्रतिशत के मानक आरक्षण के आधार पर ही काउंसलिंग आगे बढ़ाने का आदेश दिया.
गौरतलब है कि 16 सितंबर को जब हाई कोर्ट का यह अहम आदेश आया, तब तक प्रथम चरण की काउंसलिंग और अलॉटमेंट पूरा हो चुका था, इसलिए मजबूरन पुरानी प्रक्रिया को रद्द करना पड़ा. बता दें कि ठीक ऐसा ही विवाद नीट यूजी-2025 में भी हुआ था, लेकिन तब विभाग ने अदालत को खामियां सुधारने का आश्वासन दिया था, जिस पर अमल न होने के कारण इस बार कोर्ट को सख्त रुख अपनाना पड़ा.

