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 अमित शाह का बयान – बंगाल में 152 में 110 सीटें जीतेगी बीजेपी… 

पश्चिम बंगाल के 16 जिलों की 152 सीटों पर जब कल मतदान खत्म हुआ, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि दिल्ली से आया एक आंकड़ा पूरे बंगाल का सियासी भूगोल बदलने का संकेत देगा. गृह मंत्री अमित शाह ने जिस आत्मविश्वास के साथ 110 सीटों पर जीत का ऐलान किया है, उसके पीछे ‘डेटा’ और ‘रणनीति’ का ऐसा खौफनाक संगम है जिसे जानकर किसी की भी धरती खिसक सकती है. वरिष्ठ विश्लेषक समीर चौगांवकर बताते हैं कि इस बार बंगाल में 92.98% का रिकॉर्ड मतदान केवल संख्या नहीं, बल्कि दीदी के ‘सिंडिकेट राज’ के खिलाफ जनता का आक्रोश है. अमित शाह के इस कॉन्फिडेंस के पीछे की असली कहानी उन ‘गुप्त सर्वे’ और ‘बूथ प्रबंधन’ में छिपी है, जिसने ममता बनर्जी के अभेद्य माने जाने वाले किलों की नींव हिला दी है.

अमित शाह के ‘110’ वाले जादुई आंकड़े का गणित

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक समीर चौगांवकर के डेटा विश्लेषण के आधार पर, अमित शाह का 110 सीटों वाला दावा पूरी तरह वैज्ञानिक और ऐतिहासिक आंकड़ों पर आधारित है. 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने इन्हीं 152 सीटों में से 59 सीटें जीती थीं, जो उनके कुल प्रदर्शन का आधार थीं. लेकिन इस बार कहानी अलग है. समीर चौगांवकर बताते हैं कि पिछली बार भाजपा 84 अन्य सीटों पर दूसरे नंबर पर थी. यानी कुल 143 सीटों पर भाजपा और टीएमसी के बीच सीधी टक्कर थी. शाह का यह आत्मविश्वास इस डेटा से आता है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने नंदीग्राम जैसी सीटों पर अपनी बढ़त को 1956 से बढ़ाकर 8100 वोटों तक पहुंचा दिया है. चौगांवकर के मुताबिक, भाजपा ने उन 25 सीटों पर विशेष ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की है जहां पिछली बार जीत का अंतर 10 हजार से कम था. यही वो सीटें हैं जो शाह के 110 के आंकड़े को हकीकत में बदल रही हैं.

अमित शाह ने जीत का ऐलान किसके दम पर किया? इसकी पर्दे के पीछे की कहानी बेहद चौंकाने वाली है. असल में शाह ने बंगाल में ‘प्रवासी कार्यकर्ताओं’ और ‘पन्ना प्रमुखों’ की एक ऐसी फौज उतारी थी, जिसने टीएमसी के हर उस बूथ पर नजर रखी जहां पहले धांधली की आशंका होती थी. समीर चौगांवकर का विश्लेषण कहता है कि शाह के पास हर 2 घंटे का लाइव फीडबैक था. अमित शाह ने प्रेस वार्ता में साफ कहा कि पहले चरण के मतदान के दौरान एक भी राजनीतिक हत्या नहीं हुई, जो अपने आप में एक ‘अजूबा’ है. जब हिंसा रुकती है, तो साइलेंट वोटर बाहर निकलता है. शाह का मानना है कि यही ‘साइलेंट वोटर’ और ‘महिला वोटर’ भाजपा को 110 के पार ले जा रहे हैं. शाह की टीम ने बंगाल के गांव-गांव में उन 41 नई सीटों को चिन्हित किया जहाँ टीएमसी के विधायक विरोधी लहर सबसे ज्यादा थी.

अमित शाह के आत्मविश्वास के पीछे बंगाल की माताओं-बहनों का वो गुस्सा है जो ‘आरजी कर’ मेडिकल कॉलेज की घटना और संदेशखाली के बाद ज्वालामुखी बनकर फटा है. शाह ने वादा किया कि 5 तारीख को भाजपा की सरकार बनने के बाद बंगाल की बेटियां रात 1 बजे भी बिना किसी डर के सड़क पर निकल सकेंगी.

समीर चौगांवकर बताते हैं कि भाजपा ने आरजी कर पीड़िता की मां और संदेशखाली की पीड़ितों को उम्मीदवार बनाकर एक बड़ा मनोवैज्ञानिक संदेश दिया है. शाह को जमीनी इनपुट मिले हैं कि बंगाल की मातृशक्ति इस बार सुरक्षा के नाम पर एकजुट होकर ‘कमल’ का बटन दबा रही है. शाह के मुताबिक, जिस राज्य में महिला मुख्यमंत्री ही महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठाए, वहाँ की महिलाएं अब बदलाव के लिए तैयार हैं.

बंगाली मुख्यमंत्री और ‘बाहरी’ वाले नैरेटिव का अंत

ममता बनर्जी हमेशा भाजपा को ‘बाहरी’ बताकर वोट मांगती रही हैं, लेकिन इस बार शाह ने उनके इस ब्रह्मास्त्र को उन्हीं पर पलट दिया है. शाह ने गरजते हुए कहा कि बंगाल का अगला मुख्यमंत्री कोई बाहरी नहीं, बल्कि यहीं की मिट्टी में जन्मा, बंगाली मीडियम में पढ़ा-लिखा और शुद्ध बंगाली बोलने वाला कार्यकर्ता होगा.

चौगांवकर के अनुसार, शाह ने यह भी साफ कर दिया कि वो मुख्यमंत्री कम से कम ‘दीदी का भतीजा’ तो नहीं होगा. इस एक बयान ने टीएमसी के ‘इनसाइडर बनाम आउटसाइडर’ के पूरे नैरेटिव को खत्म कर दिया. शाह का यह कॉन्फिडेंस इस बात से है कि जनता अब पहचान की राजनीति से ऊपर उठकर विकास और मोदी की ‘गारंटी’ पर भरोसा कर रही है.

कांग्रेस-लेफ्ट का फैक्टर और टीएमसी का नुकसान

समीर चौगांवकर का एक और बड़ा विश्लेषण यह है कि इस बार कांग्रेस और लेफ्ट की सक्रियता टीएमसी के लिए काल बन गई है. 2024 लोकसभा के आंकड़े बताते हैं कि 11 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस को बढ़त थी. सागरदिघी उपचुनाव में कांग्रेस की जीत ने साबित कर दिया था कि मुस्लिम बहुल इलाकों में टीएमसी का वोट बैंक खिसक रहा है.

शाह के गणित के मुताबिक, कांग्रेस और लेफ्ट जितना मजबूत प्रदर्शन करेंगे, टीएमसी का वोट उतना ही कटेगा और त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा का रास्ता साफ हो जाएगा. 152 सीटों में से 110 का दावा इसी बिखराव का परिणाम है. शाह जानते हैं कि विरोधी खेमे में फूट ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है.

भ्रष्टाचार और सिंडिकेट राज का ‘ब्लैक पेपर’

अमित शाह ने 10,000 करोड़ के घोटालों और 32 से ज्यादा भ्रष्टाचार के मामलों का जिक्र कर ममता सरकार की चूलें हिला दी हैं. शाह ने वादा किया कि सत्ता में आते ही सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज से इन घोटालों की जांच कराई जाएगी और भ्रष्टाचारियों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा. समीर चौगांवकर के मुताबिक, बंगाल का मध्यम वर्ग और व्यापारी वर्ग ‘सिंडिकेट राज’ और ‘भतीजा टैक्स’ से बुरी तरह परेशान है. शाह ने उद्योगों के लिए ‘लाल जाजम’ बिछाने का जो वादा किया है, उसने युवाओं में रोजगार की नई उम्मीद जगाई है. शाह का 110 सीटों का आंकड़ा इसी ‘उम्मीद’ और ‘आक्रोश’ के डेटा पर टिका है.

अमित शाह का अंतिम ऐलान: ‘अब दीदी की विदाई तय’

प्रेस वार्ता के अंत में अमित शाह ने जो कहा, उसने बंगाल की सत्ता के भविष्य पर मुहर लगा दी. अमित शाह के शब्दों में: “बंगाल की जनता ने तय कर लिया है. 152 में से 110 सीटें भाजपा जीतने जा रही है. इसका मतलब है कि दूसरे चरण के बाद हम प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाएंगे. दीदी जाने वाली हैं और भाजपा आने वाली है. यह चुनाव एमएलए बदलने का नहीं, बल्कि घुसपैठ, भ्रष्टाचार और तुष्टीकरण से बंगाल को मुक्त कराने का है.”

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