कौन है जहांगीर खान, जिसे ‘सचेत’ करते दिखे IPS अजय पाल?
वेस्ट बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण से ठीक पहले एक वायरल वीडियो ने राजनीतिक माहौल को अलग ही स्तर पर गरमा दिया है. दक्षिण 24 परगना के फाल्टा विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा यह वीडियो न केवल प्रशासनिक सख्ती को दिखाता है, बल्कि चुनावी राजनीति में चल रही अंदरूनी खींचतान और आरोप-प्रत्यारोप को भी सामने लाता है. इस वीडियो के केंद्र में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार जहांगीर खान और एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की कार्रवाई है, जिसने पूरे घटनाक्रम को सुर्खियों में ला दिया है.
वायरल वीडियो में जिले में पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में तैनात IPS अजय पाल शर्मा एक घर के बाहर कुल पुलिस जवानों के साथ नजर आते हैं, जिसे कथित तौर पर जहांगीर खान से जुड़ा बताया जा रहा है. वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए वह कड़ी चेतावनी देते दिख रहे हैं. वीडियो में उन्हें यह कहते सुना जा सकता है कि उन्हें बार-बार ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि जहांगीर खान से जुड़े लोग वोटरों को धमका रहे हैं और अगर यह जारी रहा तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी. उनका लहजा साफ तौर पर सख्त और चेतावनी भरा नजर आता है, जिससे यह संकेत मिलता है कि प्रशासन इस बार किसी भी तरह की गड़बड़ी को लेकर गंभीर है.
सूत्रों के अनुसार, जब यह कार्रवाई हुई तब जहांगीर खान खुद वहां मौजूद नहीं थे और यह चेतावनी उनके परिवार के सदस्यों या करीबियों को दी गई थी. बताया जा रहा है कि वोटिंग से करीब 36 घंटे पहले ही खान अपने घर से निकल गए थे. इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि वे इस कार्रवाई के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएंगे और जरूरत पड़ने पर अदालत का रुख भी करेंगे. वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है. एक ओर जहां विपक्षी दल इसे कानून-व्यवस्था की स्थिति से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं, वहीं सत्ताधारी दल इसे चुनाव से पहले माहौल बिगाड़ने की कोशिश बता रहा है.
जहांगीर खान की बात करें तो वह दक्षिण 24 परगना की फाल्टा सीट से TMC के उम्मीदवार हैं. 41 वर्षीय खान ने 12वीं तक शिक्षा हासिल की है और चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके पास लगभग 2.1 करोड़ रुपये की संपत्ति है, जबकि उन पर कोई कर्ज नहीं है. आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है. हालांकि, राजनीतिक चर्चाओं और सोशल मीडिया पर उनका नाम लंबे समय से चर्चा में बना हुआ है. कुछ रिपोर्ट्स और आरोपों में दावा किया गया है कि उनका संबंध एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से है, जिसे अक्सर भाइपो के नाम से संदर्भित किया जाता है. इसके अलावा, उन पर इलाके में सक्रिय कथित सिंडिकेट नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं.
इन आरोपों में जमीन कब्जाने, तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों में संलिप्तता जैसे गंभीर दावे शामिल हैं. कुछ लोगों का यह भी कहना है कि फाल्टा क्षेत्र में चुनावी प्रक्रिया पर उनका असर रहा है और यहां वोटिंग पैटर्न असामान्य रूप से ऊंचा रहता है. हालांकि, इन सभी दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है. तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है. पार्टी का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह की खबरें फैलाकर मतदाताओं को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है. TMC नेताओं का दावा है कि यह विपक्ष की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. इस पूरे मामले में अजय पाल शर्मा की भूमिका भी काफी अहम मानी जा रही है. 2011 बैच के IPS अधिकारी शर्मा अपनी सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में वह प्रयागराज में एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस के पद पर तैनात हैं और चुनावी ड्यूटी के तहत उन्हें पश्चिम बंगाल भेजा गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी तैनाती चुनाव आयोग की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत संवेदनशील इलाकों में अनुभवी और सख्त अधिकारियों को लगाया जाता है, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके. वायरल वीडियो में उनकी सक्रियता इस बात का संकेत है कि प्रशासन चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से कराने के लिए पूरी तरह सतर्क है. अजय पाल शर्मा को लेकर टीएमसी के अलावा समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सवाल उठाए हैं.
इस घटनाक्रम ने चुनावी माहौल में एक नया मोड़ ला दिया है. जहां एक तरफ राजनीतिक दल अपने-अपने एजेंडे के साथ मैदान में हैं, वहीं दूसरी तरफ ऐसी घटनाएं मतदाताओं की धारणा को भी प्रभावित कर सकती हैं. चुनाव केवल रैलियों और प्रचार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इस तरह की घटनाएं भी जनमत को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाती हैं.

