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गोमांस खाने वालों का गौरव बढ़ा रहे भाजपाई : शंकराचार्य  अविमुक्तेश्वरानंद

भदोही में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज की 81 दिवसीय ‘गोविष्टि यात्रा’ के दौरान उन्होंने बीजेपी और सरकारों पर तीखे सवाल उठाए। गोपीगंज में प्रवास के दौरान शंकराचार्य ने गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित कराने और गौवंशों की दुर्दशा के खिलाफ इस यात्रा का उद्देश्य बताया।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज की ‘गोविष्टि यात्रा’ गुरुवार शाम गोरखपुर से चलकर भदोही के गोपीगंज पहुंची। यहां यात्रा का स्वागत किया गया। शुक्रवार सुबह यह यात्रा गोपीगंज से सिंहपुर, ज्ञानपुर और मोढ होते हुए जौनपुर के लिए आगे बढ़ी।

शंकराचार्य ने देश में गौवंशों की दयनीय स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में गौमांस का निर्यात बढ़ा है और प्रतिदिन गौहत्याएं हो रही हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। उन्होंने यह भी कहा कि करोड़ों गायों के लिए सरकार ने केवल 10 से 12 हजार गौ आश्रय स्थल बनाए हैं, जिनमें 10-12 लाख गायें भी सुरक्षित नहीं हैं। यात्रा में विपक्षी नेताओं और समर्थकों के शामिल होने तथा राजनीति करने के आरोपों पर शंकराचार्य ने स्पष्ट जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उनके लिए कोई विपक्षी नहीं है, बल्कि विपक्ष सत्ता में बैठे लोगों के लिए होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके लिए सरकार अपनी होती है और आज सत्तापक्ष ही विपक्ष की भाषा बोल रहा है। बीजेपी पर निशाना साधते हुए शंकराचार्य ने कहा कि उन्होंने सभी दलों और लोगों को साथ आने का निमंत्रण दिया था। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि खुद को सबसे बड़ा सनातनी बताने वाले सत्ताधारी लोग सबसे पहले साथ आएंगे, लेकिन वे साथ आने वालों पर ही सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने प्रश्न किया कि क्या गाय उनके लिए महत्वपूर्ण नहीं है?

उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी को गोमांस खाने वालों के वोट भी चाहिए। शंकराचार्य ने दावा किया कि असम चुनाव के दौरान बीजेपी नेताओं ने इसे स्वीकार किया था। उन्होंने कहा कि जो लोग गौ हत्यारों से संबंध रखते हैं, गौहत्या से जुड़ी कंपनियों से चंदा लेते हैं और गोमांस खाने वालों को कैबिनेट में शामिल कर गौरव महसूस करते हैं, उनसे उनका अपनत्व नहीं हो सकता।

पश्चिम बंगाल में स्कूलों में ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य किए जाने और गौहत्या पर सख्ती के आदेश पर भी शंकराचार्य ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश में 12 साल से बीजेपी की सरकार है, तो पूरे देश के स्कूलों में वंदे मातरम अनिवार्य क्यों नहीं किया गया और गौ रक्षा को लेकर वैसी सख्ती पूरे देश में क्यों नहीं दिखाई गई। आखिर अगर इनकी मंशा साफ है, तो बीजेपी के सिलेक्टिव भाव क्यों हैं?

दरअसल, पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा में ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य किया है, वहीं गौवध को लेकर भी सख्ती बढ़ाने के आदेश जारी किए गए हैं। शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि हिंदुत्व के नाम पर राजनीति हो रही है। उन्होंने कहा कि तिलक और गेरुआ वस्त्र पहनकर मछली खाने वालों से हिंदुत्व की असलियत समझ में आ जाती है। यह हिंदू भावनाओं और छवि को तोड़ने जैसा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पश्चिम बंगाल में गौहत्या रोकने को लेकर जो सख्ती दिखाई जा रही है, उसकी बुनियाद कलकत्ता हाईकोर्ट में हम हिंदू पक्ष की ओर से लड़ी गई उस कानूनी लड़ाई में है, जिसमें भदोही के गोपीगंज निवासी अधिवक्ता डॉ. पीएन मिश्रा ने पैरवी की थी। उसमें श्रीकांत बालव्यास वादी मुकदमा थे। उन्होंने कहा कि उसी आदेश के क्रम में बंगाल की नई बीजेपी की सरकार ने यह गोवध परस सख्ती का नया आदेश जारी किया है।

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