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सांदीपनि विद्यालय गढ़ाकोटा ने रचा राष्ट्रीय इतिहास

फिक्की के अराइज अवॉर्ड 2026 में ‘फ्यूचर रेडी स्किल एजुकेशन’ श्रेणी में हासिल किया प्रथम स्थान, इस श्रेणी में राष्ट्रीय सम्मान पाने वाला मध्यप्रदेश का पहला शासकीय विद्यालय बना सांदीपनि विद्यालय
दिल्ली में मिला राष्ट्रीय सम्मान, शिक्षकों के नवाचार, तकनीकी शिक्षा और विद्यार्थियों की सहभागिता ने दिलाई देशभर में पहचान

सागर/गढ़ाकोटा। शिक्षा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करते हुए शासकीय सांदीपनि विद्यालय, गढ़ाकोटा ने राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। देशभर के 700 से अधिक विद्यालयों के बीच अपनी उत्कृष्ट शैक्षणिक गतिविधियों, नवाचारों और कौशल आधारित शिक्षा के दम पर सांदीपनि विद्यालय ने फिक्की के प्रतिष्ठित अराइज अवॉर्ड 2026 में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। विद्यालय को ‘फ्यूचर रेडी स्किल एजुकेशन’ श्रेणी में यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया। इस उपलब्धि के साथ सांदीपनि विद्यालय गढ़ाकोटा मध्यप्रदेश का पहला शासकीय विद्यालय बन गया है, जिसे इस श्रेणी में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। इसे देश के शासकीय विद्यालयों के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

गढ़ाकोटा जैसे कस्बाई क्षेत्र के शासकीय विद्यालय का देशभर के प्रतिष्ठित विद्यालयों के बीच अपनी प्रतिभा और कार्यशैली के दम पर प्रथम स्थान हासिल करना क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। यह उपलब्धि बताती है कि बेहतर नेतृत्व, शिक्षकों की प्रतिबद्धता, विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के समन्वय से शासकीय विद्यालय भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना सकते हैं।
दिल्ली में आयोजित समारोह में मिला सम्मान

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली स्थित डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में 25 एवं 26 सितंबर को आयोजित अराइज लर्निंग फेस्टिवल के दौरान सांदीपनि विद्यालय गढ़ाकोटा को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया। राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन में शिक्षा, नवाचार और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण व्यवस्था विकसित करने से जुड़े विशेषज्ञों, शिक्षाविदों एवं विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति रही।

विद्यालय की ओर से प्राचार्य शिव सिंह ठाकुर, कार्यालय प्रभारी जयकांत खरे, कार्यक्रम प्रभारी मोहित समाधिया एवं शिक्षक प्रतिनिधि देवेंद्र सिंह लोधी ने समारोह में सहभागिता करते हुए सम्मान ग्रहण किया। राष्ट्रीय मंच पर विद्यालय का प्रतिनिधित्व करने वाली टीम ने गढ़ाकोटा में संचालित शैक्षणिक गतिविधियों और नवाचारों को प्रस्तुत किया।

700 से अधिक विद्यालयों के बीच चयन, कई चरणों में हुई प्रक्रिया

फिक्की के अराइज अवॉर्ड 2026 के लिए देशभर के 700 से अधिक विद्यालयों ने आवेदन किया था। इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चयन प्रक्रिया विभिन्न चरणों में पूरी की गई। प्रारंभिक स्तर पर आवेदन करने वाले विद्यालयों के दस्तावेजों, शैक्षणिक गतिविधियों, नवाचारों और उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों का परीक्षण किया गया। निर्धारित मानकों के आधार पर चयनित विद्यालयों को अगले चरण के लिए आमंत्रित किया गया।

इसी प्रक्रिया के तहत सांदीपनि विद्यालय गढ़ाकोटा ने अपने शैक्षणिक कार्यों और कौशल आधारित शिक्षा से जुड़े प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया। विद्यालय की गतिविधियों, विद्यार्थियों की सहभागिता, तकनीकी संसाधनों के उपयोग तथा भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराने के प्रयासों को प्रस्तुतीकरण का प्रमुख आधार बनाया गया।

12 सितंबर को नई दिल्ली स्थित फिक्की मुख्यालय में राष्ट्रीय स्तर की पांच सदस्यीय विशेषज्ञ ज्यूरी के समक्ष विद्यालय की ओर से विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। इसमें विद्यालय में संचालित गतिविधियों और उनके प्रभाव से संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। चयन प्रक्रिया के अंतिम चरण में विद्यालय के कार्यों का मूल्यांकन किया गया, जिसके बाद ‘फ्यूचर रेडी स्किल एजुकेशन’ श्रेणी में सांदीपनि विद्यालय को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ।

‘उत्कर्ष’ पत्रिका से आईसीटी लैब तक, नवाचारों ने बनाई अलग पहचान

सांदीपनि विद्यालय गढ़ाकोटा की इस उपलब्धि के पीछे विद्यालय में संचालित विभिन्न शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किए गए कार्यों में विद्यार्थियों की रचनात्मकता, व्यावहारिक ज्ञान, तकनीकी दक्षता और कौशल विकास को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।

विद्यालय की हस्तलिखित पत्रिका ‘उत्कर्ष’ विद्यार्थियों की रचनात्मक अभिव्यक्ति और लेखन प्रतिभा का उदाहरण है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी कल्पनाशीलता, विचारों और सृजनात्मक क्षमता को सामने लाने का अवसर मिलता है। वहीं, आईसीटी लैब के माध्यम से तकनीकी संसाधनों का उपयोग करते हुए शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और रोचक बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

विद्यालय में नियमित रूप से आयोजित होने वाली शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियां, विभिन्न क्लब, प्रोजेक्ट कार्य और विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता भी इस उपलब्धि के प्रमुख आधारों में शामिल रहे। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव, समस्या समाधान, रचनात्मक सोच और सामूहिक रूप से कार्य करने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

विद्यालय में शिक्षा को केवल पारंपरिक पाठ्यक्रम तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों और बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। कौशल आधारित शिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों में ऐसे गुण विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, जो उन्हें आगे की शिक्षा, रोजगार और जीवन की विभिन्न परिस्थितियों में उपयोगी साबित हो सकें।

शिक्षकों के सतत प्रशिक्षण और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों पर जोर

विद्यालय की उपलब्धि में शिक्षकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना गया है। विद्यालय प्रबंधन के अनुसार शिक्षकों के निरंतर व्यावसायिक विकास, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और नवाचार आधारित अध्यापन पर विशेष ध्यान दिया जाता है। बदलती शैक्षणिक जरूरतों के अनुरूप शिक्षकों को नई तकनीकों को अपनाने और शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

वर्तमान समय में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। डिजिटल तकनीक, कौशल विकास और विद्यार्थियों की व्यक्तिगत क्षमताओं को पहचानने की आवश्यकता पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में शिक्षक स्वयं भी निरंतर सीखते रहें और विद्यार्थियों को नए अवसरों के लिए तैयार करें, इसी सोच के साथ विद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है।

विद्यालय में तकनीकी संसाधनों के उपयोग के साथ विद्यार्थियों को गतिविधि आधारित शिक्षण, परियोजना कार्य और सामूहिक सहभागिता के माध्यम से सीखने के अवसर दिए जा रहे हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य विद्यार्थियों में विषय की समझ विकसित करने के साथ-साथ आत्मविश्वास, तार्किक क्षमता और रचनात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है।

प्राचार्य शिव सिंह ठाकुर बोले—टीम के निरंतर प्रयासों का परिणाम है सम्मान

विद्यालय के प्राचार्य शिव सिंह ठाकुर ने इस राष्ट्रीय उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के क्षेत्र में लगातार बदलाव हो रहे हैं। विद्यार्थियों की आवश्यकताएं और भविष्य की चुनौतियां भी बदल रही हैं। ऐसे में शिक्षकों का निरंतर सीखना और शिक्षण पद्धतियों में समयानुकूल बदलाव करना आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि सांदीपनि विद्यालय में इसी दृष्टिकोण के साथ विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों, परियोजनाओं और तकनीकी संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है। विद्यार्थियों को सीखने के अधिक अवसर उपलब्ध कराने और उनकी क्षमताओं को विकसित करने के लिए विद्यालय की पूरी टीम निरंतर प्रयासरत है।

Umh News india

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